Delhi News: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता प्रेमनाथ की पुण्यतिथि पर सिनेमा जगत उन्हें याद कर रहा है। कभी सेना छोड़कर हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे प्रेमनाथ ने असफलता मिलने के बाद संन्यासी का जीवन भी बिताया। इसके बाद जब उन्होंने पर्दे पर बतौर विलेन वापसी की, तो अपनी रौबदार आवाज और दमदार अभिनय से खलनायकी को नई पहचान दी।
प्रेमनाथ का जन्म पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार मध्य प्रदेश आकर बस गया। उनके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे और उन्होंने प्रेमनाथ को सेना में भर्ती भी करा दिया था। सेना की सख्त दिनचर्या के बीच उनका मन कभी नहीं लगा, क्योंकि बचपन से ही उनके भीतर अभिनय का जुनून था। इसी सपने को पूरा करने के लिए वे सेना छोड़कर मुंबई आ गए।
मुंबई पहुंचने के बाद प्रेमनाथ मशहूर ‘पृथ्वी थिएटर’ से जुड़े, जहां से उनके अभिनय के सफर को नई दिशा मिली। शुरुआती दिनों में उन्हें काम मिला और वे धीरे-धीरे पहचान बनाने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री बीना राय से हुई, जो आगे चलकर विवाह में बदली। शादी के बाद दोनों ने मिलकर ‘पी.एन. फिल्म्स’ नाम से प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। हालांकि, इस बैनर तले बनी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। जहां बीना राय का करियर आगे बढ़ रहा था, वहीं प्रेमनाथ बतौर मुख्य अभिनेता अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
लगातार मिली नाकामयाबी के बाद अपना लिया था संन्यास
फिल्मों में लगातार मिल रही असफलताओं ने प्रेमनाथ को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। हालात ऐसे बने कि उन्होंने सिनेमा जगत से पूरी तरह दूरी बना ली। इस दौर में उनका जीवन पूरी तरह बदल गया और वे संन्यासियों की तरह सादगी और वैराग्य में रहने लगे। हालांकि, कुछ सालों बाद उन्होंने सिनेमा में दोबारा लौटने का फैसला किया, लेकिन इस बार उनकी रणनीति बदल चुकी थी।
विलेन बनकर चमकी किस्मत, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया काम
वापसी के बाद प्रेमनाथ ने हीरो बनने की जिद छोड़कर खलनायक के किरदारों पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी भारी आवाज, रौबदार कद-काठी और सशक्त संवाद अदायगी ने नकारात्मक किरदारों में जान फूंक दी। फिल्म ‘जानी दुश्मन’ में उनके निभाए किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद वे हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित और प्रभावशाली खलनायकों में गिने जाने लगे। उन्होंने साबित किया कि सिनेमा में पहचान बनाने के लिए सिर्फ हीरो बनना जरूरी नहीं है।
प्रेमनाथ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम किया। वे 1969 की अमेरिकी फिल्म ‘केनरे’ और 1967 से 1969 के बीच अमेरिकी टीवी धारावाहिक ‘माया’ में नजर आए। हिंदी सिनेमा में वे आखिरी बार फिल्म ‘हम दोनों’ में दिखे थे।
कपूर परिवार से रहा खास पारिवारिक रिश्ता
प्रेमनाथ और राज कपूर की मित्रता बेहद गहरी थी। राज कपूर की निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा प्रेमनाथ के परिवार से जुड़ा है। एक बार राज कपूर, प्रेमनाथ के साथ मध्य प्रदेश के रीवा गए थे, जहां उनकी मुलाकात प्रेमनाथ की बहन कृष्णा से हुई और आगे चलकर दोनों का विवाह हुआ। वहीं, उनकी दूसरी बहन उमा का विवाह अभिनेता प्रेम चोपड़ा से हुआ।
3 नवंबर 1992 को 65 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। भले ही आज वे दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए गए सशक्त किरदार भारतीय सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे।