New Delhi News: नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विवाद बढ़ने के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया है।
अनुपम खेर ने छात्रों के आंदोलन और लोकतंत्र पर रखी राय
अभिनेता अनुपम खेर ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना एक सकारात्मक बात है। आंदोलन के नतीजे को उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताया, लेकिन विरोध के तरीके पर सवाल भी उठाए।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर गहरा दुख जताया। अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोकतंत्र में असहमति और सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन विरोध दर्ज कराते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
देश को आगे बढ़ने और संवाद की संस्कृति बनाए रखने की सलाह
अनुपम खेर ने कहा कि किसी एक मुद्दे पर पूरा राष्ट्र हमेशा के लिए नहीं ठहर सकता। अब समय आ गया है कि देश इस आंदोलन से आगे बढ़कर भविष्य पर ध्यान दे। सार्वजनिक मंचों पर असम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल से समाज की साख को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी नेता की नीतियों की आलोचना करना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। हालांकि, समाज को आने वाली पीढ़ियों के लिए सम्मानजनक संवाद की संस्कृति छोड़कर जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज की पहचान उसके व्यक्त करने के तरीके से होती है।