Shimla News: हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ (एचजीसीटीए) ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने का स्वागत किया है। संघ ने इसे राज्य के हजारों संविदा कर्मचारियों की ऐतिहासिक और निर्णायक जीत बताया है।
एचजीसीटीए की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. बनीता सकलानी ने कहा कि हाई कोर्ट एक दशक से संविदा अवधि को सेवा लाभों से अलग न करने का आदेश दे रहा था। ताज मोहम्मद मामले समेत कई फैसलों में अदालत ने संविदा सेवा को पेंशन, वरिष्ठता और पदोन्नति में जोड़ने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
सरकार के नए सेवा कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एचजीसीटीए
डॉ. सकलानी ने आरोप लगाया कि अदालती आदेशों को मानने के बजाय सरकार ने भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम 2025 लागू किया। इसका मकसद कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित करना था। हाई कोर्ट ने इस कानून को असंवैधानिक ठहराकर रद्द कर दिया था, जिसके खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सरकार की दलीलें खारिज कर दीं। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वित्तीय बोझ का बहाना बनाकर कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार नहीं छीने जा सकते। कोर्ट ने पुरानी याचिकाओं को निरस्त करते हुए अपने विधिक सिद्धांतों को दोहराया।
कर्मचारियों को जल्द सेवा लाभ देने की मांग
एचजीसीटीए अध्यक्ष ने कहा कि अब यह कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकार के पास लाभ टालने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं बचा है। राज्य सरकार बिना किसी देरी के कर्मचारियों की संविदा सेवा को वरिष्ठता, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों के लिए मान्यता दे।
शिक्षक संघ ने मांग की है कि सरकार सभी विभागों को तुरंत कार्यान्वयन निर्देश जारी करे। इससे पात्र कर्मचारियों को अदालत से मंजूर लाभ बिना किसी देरी या नए मुकदमेबाजी के मिल सकेंगे। अब कर्मचारियों के हक में कोई प्रशासनिक या कानूनी बाधा बाकी नहीं रह गई है।