Shimla News: गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) दिलाने वाली व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। किच्छा बाईपास स्थित एक प्राइवेट स्कूल में पूर्व प्रधान के बेटे के संदिग्ध दस्तावेजों के बावजूद एडमिशन का मामला सामने आया है। अभिभावकों ने विभाग पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया है।
आय प्रमाण पत्र की जांच के बीच मिला एडमिशन
प्रशासन ने आय प्रमाण पत्र में गड़बड़ी मिलने पर एक मोबाइल व्यापारी के बच्चे का आरटीई एडमिशन तुरंत रद्द कर दिया। वहीं दूसरी ओर शिमला पिस्तौर गांव के पूर्व प्रधान यामीन के बेटे का एडमिशन जांच पेंडिंग होने के बाद भी नर्सरी में कर लिया गया। इस बात को लेकर बाकी अभिभावकों में भारी नाराजगी है।
प्रवेश के लिए जमा किए गए आय प्रमाण पत्र की पात्रता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नियम के मुताबिक जब तक डॉक्यूमेंट्स की जांच पूरी नहीं होती, तब तक प्रवेश को अंतिम रूप नहीं दिया जाना चाहिए था। अब एडमिशन हो जाने के बाद विभाग की जांच की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दो महीने से लटकी जांच से अभिभावक परेशान
गदरपुर इलाके में आरटीई के कई आवेदनों की जांच बीते दो महीनों से अधर में लटकी है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में हो रही देरी से सही और फर्जी आवेदकों की पहचान नहीं हो पा रही है। अभिभावकों का कहना है कि जब ज्यादातर सीटों पर एडमिशन हो चुके हैं, तब जांच प्रक्रिया को धीमा रखना गलत है।
जिले की पहली लिस्ट में करीब पांच हजार बच्चों का सेलेक्शन हुआ था। इसके बाद आय और निवास प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन किया जाना था। इस दौरान सख्ती बढ़ने पर फर्जीवाड़े के डर से दो आवेदकों ने अपने फॉर्म खुद ही वापस ले लिए हैं। अधिकारियों ने अब बाकी मामलों में तेजी से कार्रवाई की बात कही है।
खंड शिक्षा अधिकारी ने दी सफाई
खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम ने कहा, “आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार कराई जा रही है। जिन भी आवेदनों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी जांच संबंधित स्तर से कराई जा रही है। किसी भी अभिभावक के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पात्रता के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि किसी आवेदन में आय प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”