TCS में IT मैनेजर से IPS बनने तक: जानिए बिहार कैडर के अधिकारी कांतेश कुमार मिश्रा की सफलता की कहानी

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Muzaffarpur: कंप्यूटर साइंस में बीटेक और आईटी कंपनी टीसीएस में नौकरी करने के दौरान कांतेश कुमार मिश्रा ने यूपीएससी की तैयारी की। पहले प्रयास में असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और दूसरे प्रयास में 138वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बने। वर्तमान में मुजफ्फरपुर एसएसपी के पद पर कार्यरत कांतेश मिश्रा एक चर्चित पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ संवेदनशील लेखक भी हैं।

मुजफ्फरपुर। नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा पास करना आसान नहीं होता, लेकिन बिहार कैडर के 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी कांतेश कुमार मिश्रा ने इसे सच कर दिखाया। देश की जानी-मानी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में आईटी मैनेजर के पद पर रहते हुए उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और दूसरे प्रयास में 138वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में स्थान बनाया। वर्तमान में वह मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कांतेश कुमार मिश्रा मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के आरा के निवासी हैं। उनके पिता शिक्षक थे, जिसके चलते उनका बचपन बिहार से बाहर बीता। जब वह करीब चार साल के थे, तब उनका परिवार पश्चिम बंगाल चला गया। उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा डीएवी स्कूल आसनसोल से हुई। इसके बाद पिता का स्थानांतरण ओडिशा के सुंदरगढ़ में होने पर उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई वहीं पूरी की। घर में पिता और बड़ी बहन के कारण हिंदी और संस्कृत साहित्य का माहौल था, जिसने कांतेश में भी भाषा और साहित्य के प्रति गहरी रुचि जगाई।

सेना में चयन न होने के बाद चुना सिविल सेवा का रास्ता

कांतेश के पिता चाहते थे कि वह शिक्षक बनें, लेकिन कांतेश के मन में शुरुआत से ही कुछ अलग करने का लक्ष्य था। स्कूल के दिनों में वह प्रतियोगी पत्रिकाएं पढ़ते थे। 12वीं के बाद उन्होंने सेना में जाने का प्रयास किया, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद चयन नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की राह चुनी और बंगाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की।

इंजीनियरिंग के बाद उनका चयन टीसीएस में हुआ। कंपनी में काम के दौरान वह कोयंबटूर और कोलकाता में पदस्थापित रहे, जहां वह बैंकिंग सेक्टर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर आईटी मैनेजर के रूप में कार्यरत थे। कॉर्पोरेट करियर की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने यूपीएससी का सपना नहीं छोड़ा। वह वीकेंड और खाली समय में पढ़ाई करते थे।

पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, दूसरे में मिली 138वीं रैंक

वर्ष 2013 में कोलकाता में रहते हुए उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को गंभीरता से शुरू किया। यहां उन्हें 2007 बैच के अधिकारी डॉ. उदीपन मुखर्जी का मार्गदर्शन मिला। पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना पाए। इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया।

वर्ष 2014 में अपने दूसरे प्रयास में कांतेश मिश्रा ने 138वीं रैंक हासिल की। अंतिम परिणाम घोषित होने के समय वह बैंक के कार्यालय में काम कर रहे थे, तभी उनके एक मित्र ने फोन कर उनके चयन की सूचना दी। इसके बाद उन्हें बिहार कैडर आवंटित हुआ।

नक्सल ऑपरेशन, सीमा प्रबंधन और चर्चित कार्यवाहियां

आईपीएस अधिकारी के रूप में कांतेश कुमार मिश्रा ने बिहार के कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह पटना, सीवान, औरंगाबाद और मोतिहारी में विभिन्न पदों पर रहे। वह सीवान में एएसपी, पटना में ग्रामीण एसपी और गया में भी तैनात रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में संयुक्त उप निदेशक (ज्वाइंट डिप्टी डायरेक्टर) और सीआईडी में भी सेवाएं दीं। जनवरी 2026 में उन्हें मुजफ्फरपुर का एसएसपी बनाया गया।

अपने कार्यकाल के दौरान औरंगाबाद में उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियानों का संचालन किया, वहीं मोतिहारी में भारत-नेपाल सीमा से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया। वर्ष 2019 में पटना ग्रामीण एसपी रहते हुए मोकामा के तत्कालीन विधायक अनंत सिंह के पैतृक आवास पर हुई छापेमारी में वह शामिल थे, जहां से पुलिस ने एके-47 बरामद की थी। कांतेश मिश्रा के अनुसार, पुलिसिंग केवल अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों की समझ, टीम प्रबंधन और जनसुनवाई इसका अनिवार्य हिस्सा हैं।

वर्दी के साथ साहित्य साधना: प्रकाशित हो चुकी हैं तीन पुस्तकें

कांतेश कुमार मिश्रा की पहचान केवल एक सख्त पुलिस अधिकारी की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील साहित्यकार की भी है। स्कूल के समय से लिखने के शौकीन रहे कांतेश के अब तक तीन काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं—‘पाटलिपुत्र की छांव से’, ‘मगध सा मन’ और ‘इंद्रप्रस्थ के काश-पुष्प’। ‘पाटलिपुत्र की छांव से’ की रचना उन्होंने पटना ग्रामीण एसपी रहते हुए की थी, जबकि ‘मगध सा मन’ औरंगाबाद में तैनाती के दौरान लिखी गई।

इसके अलावा वर्ष 2024 में बच्चों की कहानियों की एक पुस्तक तथा वर्ष 2017 में यूपीएससी से जुड़ी एक पुस्तक में वह सह-लेखक के रूप में शामिल रहे। उनका मानना है कि पुलिस सेवा के तनाव और व्यस्तता के बीच साहित्य उन्हें मानवीय संवेदनाओं से जोड़े रखता है और मानसिक संबल प्रदान करता है।

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