Mumbai News: आईआईटी बॉम्बे ने कैंपस में समानता बनाए रखने के लिए नया आदेश जारी किया है। संस्थान ने छात्रों, फैकल्टी और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी छात्र से उसकी जाति, प्रवेश श्रेणी या जेईई एडवांस्ड रैंक न पूछें। यह कदम सामाजिक और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए उठाया गया है।
भेदभाव रोकने के लिए जारी हुईं नई गाइडलाइंस
संस्थान का मानना है कि ऐसे सवालों से पूर्वाग्रह और भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। मंगलवार को जारी दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य कैंपस में सभी पृष्ठभूमि के छात्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र से गेट स्कोर या जाति का संकेत देने वाली जानकारी पूछना अनुचित है।
डीन छात्र मामलों के कार्यालय ने ईमेल के जरिए सभी को सूचित किया है। इसमें कहा गया कि केवल जिज्ञासा से पूछे गए सवाल भी छात्रों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या बातचीत में नफरत फैलाने वाले और जातिवादी संदेशों को साझा करने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद बड़ा कदम
यह फैसला 18 सितंबर को छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद लिया गया है। साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। इसके बाद उनके परिजनों ने एक प्रोफेसर पर उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस ने इस मामले में संबंधित प्रोफेसर से लंबी पूछताछ भी की थी।
इस बीच छात्र कैंपस के मुख्य द्वार पर बातचीत की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं मृतक छात्र के माता-पिता आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन ने अब छात्रों से खेल, संगीत, फिल्म और पढ़ाई जैसी साझा रुचियों के आधार पर आपस में जुड़ने की अपील की है।
