New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देते हुए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच वर्षों यानी 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना का नाम अब बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना कर दिया गया है।
इस बड़े पुनर्गठन के तहत योजना की तीन प्रमुख उप-योजनाओं से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम हटा दिया गया है। अब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना को पीएम वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा पेंशन को पीएम विधवा पेंशन योजना और दिव्यांग पेंशन को पीएम दिव्यांगजन पेंशन योजना के नाम से जाना जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा के लिए 53,428 करोड़ रुपये का बजट
सरकार ने इस व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क के लिए 53,428 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना से देश के करीब 3.2 करोड़ जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। इस योजना का प्राथमिक लाभ देश के बुजुर्गों, बेसहारा विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सीधे तौर पर पहुंचेगा।
बता दें कि इससे पहले सरकार ने पिछले साल दिसंबर में ग्रामीण विकास की प्रमुख योजना मनरेगा का नाम भी बदला था। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ किया गया था। उसी क्रम में अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के नाम में यह ऐतिहासिक फेरबदल हुआ है।
दिव्यांग पेंशन की दरों और पात्रता नियमों में राहत
सरकार ने इस बदलाव में दिव्यांगजन पेंशन को लेकर सबसे बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। जन्म से लेकर 79 वर्ष की आयु तक के पात्र दिव्यांगों की मासिक सहायता राशि 300 रुपये से बढ़ाकर 375 रुपये कर दी गई है। वहीं 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग दिव्यांगों के लिए यह पेंशन 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये प्रति माह तय की गई है।
पात्रता को आसान बनाते हुए बेंचमार्क विकलांगता की सीमा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। यह कदम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत उठाया गया है, जिसके अनुसार दिव्यांगों की सहायता अन्य श्रेणियों से 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए। इस संशोधन से देश के करीब 27.48 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को पेंशन का सीधा लाभ मिलेगा।
