Rampur News: बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में खेत के पानी के विवाद को लेकर वृद्ध चाचा-चाची पर फावड़े के डंडे से जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने भतीजे को दोषी ठहराया है। अपर जिला जज कुलदीप सिंह ने अभियुक्त को सात साल के कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित अदालत (महिला विरुद्ध अपराध) कुलदीप सिंह की अदालत ने वृद्ध चाचा और चाची पर जानलेवा हमला करने के छह साल पुराने मामले में भतीजे रंजीत सिंह उर्फ भूरा को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि जमा होने के बाद आधी-आधी धनराशि दोनों वृद्ध पीड़ितों को दी जाएगी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियुक्त किसी भी तरह की सहानुभूति का पात्र नहीं है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंजू सिंह ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन पक्ष के गवाहों और ठोस साक्ष्यों ने घटना को पूरी तरह साबित किया है। अभियुक्त ने फावड़े के डंडे से अपने वृद्ध चाचा के सिर पर घातक वार किया था, जिससे उनकी जान जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। समय पर अस्पताल पहुंचने और सिर की जटिल सर्जरी होने से उनकी जान बच सकी, लेकिन गंभीर चोट के कारण वे आज भी सामान्य रूप से बोलने और समझने में असमर्थ हैं। वहीं, हमले में चाची का दायां हाथ टूट गया था, जिसमें रॉड डाली गई और वे अब भी उस हाथ से काम करने में लाचार हैं।
खेत में पानी के रिसाव को लेकर हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार, यह घटना बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव बहापुर गंगापुर में 11 मार्च 2020 को घटी थी। गांव निवासी रामपाल और उनकी पत्नी इंद्रवती अपने जानवरों के लिए चारा काटने खेत पर गए थे। उनके खेत के पास ही उनके बड़े भाई का खेत है, जिसमें से पानी रिसकर रामपाल की फसल को बर्बाद कर रहा था।
जब रामपाल ने अपने भतीजे रंजीत सिंह उर्फ भूरा से पानी का रिसाव बंद करने को कहा, तो रंजीत आगबबूला हो गया और उसने फावड़े के डंडे से अपने चाचा पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंची चाची इंद्रवती को भी उसने बेरहमी से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। आसपास के ग्रामीणों के मौके पर पहुंचने के बाद हमलावर वहां से फरार हो गया।
11 गवाहों की गवाही से साबित हुआ अपराध
हमले में घायल दंपती के बेटे सरदीप की तहरीर पर पुलिस ने 15 मार्च 2020 को अभियुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना पूरी करने के बाद पुलिस ने 13 अगस्त 2020 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत ने 13 जुलाई 2021 को संज्ञान लेते हुए आरोप तय किए और 9 अगस्त 2021 से मामले का ट्रायल शुरू हुआ।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने झूठी नामजदगी का तर्क देकर रिहाई की मांग की, लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 11 गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।