Bhubaneswar News: चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी और आंतरिक जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। पुरी जिले में दीवार ढहने से एक महिला की मौत हो गई। राज्य प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों से 28 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाया है, जिनमें 2,200 से अधिक गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ की लैंडफॉल प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ओडिशा के दक्षिणी और आंतरिक हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और तेज हवाओं का संकट बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों में निचले इलाकों में जलभराव, नदियों का जलस्तर बढ़ने तथा सड़क व बिजली सेवाएं प्रभावित होने की चेतावनी जारी की है। राहत व बचाव कार्यों की जानकारी देते हुए विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रभाकर पाटिल ने बताया कि आठ जिलों से लगभग 28 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस बीच, पुरी जिले में तूफान के कारण दीवार गिरने से 40 वर्षीय महिला की दर्दनाक मौत हो गई।
पुरी में पेड़ गिरने से ढही दीवार, महिला की मौत
चक्रवात से जुड़ी यह दुखद घटना पुरी जिले के अस्तरंग प्रखंड स्थित जेनापुर गांव में हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 40 वर्षीय लोभामति मुदुली अपने घर की रसोई में खाना बना रही थीं। इसी दौरान तेज हवाओं के चलते पास का एक भारी पेड़ उखड़कर रसोई से सटी ईंट की दीवार पर गिर पड़ा। पेड़ के वजन से दीवार भरभराकर ढह गई और लोभामति मलबे के नीचे दब गईं। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें मलबे से निकालकर तुरंत चरिचक अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व मुआवजा देने की मांग की है।
छह घंटे में पूरी हुई लैंडफॉल प्रक्रिया
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात अर्णव ने बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश के तट पर बापाटला और विशाखापट्टनम के बीच स्थित यनम के दक्षिण में दस्तक दी। लैंडफॉल की यह प्रक्रिया रात लगभग 1:20 बजे शुरू होकर सुबह करीब 8:00 बजे तक, यानी लगभग छह घंटे तक चली। इस दौरान तटीय क्षेत्रों में हवा की निरंतर गति 125 से 135 किमी प्रति घंटे रही, जो झोंकों के साथ 150 किमी प्रति घंटे तक पहुंची। चक्रवात की गति धीमी रहने के कारण यह लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में केंद्रित रहा और बाद में अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ा।
28 हजार लोग सुरक्षित स्थलों पर स्थानांतरित
एसआरसी राजेश प्रभाकर पाटिल ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए आठ संवेदनशील जिलों से लगभग 28 हजार लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया है। प्रशासन की योजना स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त लोगों को भी स्थानांतरित करने की है। विशेष प्राथमिकताओं के तहत 2,200 से अधिक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित केंद्रों व अस्पतालों में पहुंचाया गया है। आश्रय स्थलों में रह रहे नागरिकों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इससे पहले आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने अलग बयान में प्रभावित इलाकों से करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने तथा 4,072 गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनमें से लगभग 2,000 को अस्पतालों व आश्रय केंद्रों में स्थानांतरित करने की जानकारी दी थी।
दक्षिणी ओडिशा में 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, चक्रवात की धीमी गति के कारण दक्षिणी ओडिशा में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश का प्रभाव लंबे समय तक देखा जा सकता है। कुछ क्षेत्रों में 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होने की आशंका है। दक्षिणी ओडिशा में 80 से 90 किमी प्रति घंटे और छत्तीसगढ़ सीमा से सटे आंतरिक जिलों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने लगातार बारिश से शहरी जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, मौसम विभाग ने अंडमान सागर में एक नया चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की सूचना दी है, जिसकी दिशा और प्रभाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।