दिल्ली: फर्जी ई-मेल और फोन कॉल से कंपनी के खाते से उड़ाए लाखों, दो गिरफ्तार; 2.50 करोड़ की संपत्ति बरामद

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Central Delhi News: दिल्ली पुलिस की केंद्रीय जिला टीम ने बैंक अधिकारियों को झांसे में लेकर कंपनियों के खातों से रकम उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 1500 ग्राम सोना, थार गाड़ी और नकदी समेत करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की है।

केंद्रीय जिला पुलिस ने बैंक अधिकारियों के भरोसे का गलत फायदा उठाकर कॉर्पोरेट कंपनियों के बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कराने वाले एक साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से करीब 2.50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की है। बरामद सामान में लगभग 1500 ग्राम सोना, 101 सोने के सिक्के, सोने की चेन, कड़े, हार, अंगूठियां, झुमके, 2.37 लाख रुपये नकद और एक नई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी शामिल है। पकड़े गए आरोपियों में से एक जाली मुद्रा के मामले में पिछले सात वर्षों से घोषित अपराधी था।

फर्जी ई-मेल और फोन कॉल से की गई 22.56 लाख की ठगी

दिल्ली पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्रीय जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौधरी की निगरानी में की गई। मामला बैंक ऑफ इंडिया की राजेंद्र प्लेस शाखा से संबंधित है।

आरोपियों ने बैंक के एक अधिकारी को फोन कर खुद को कॉर्पोरेट कंपनी का निदेशक दीपक मल्होत्रा बताया। पहले एक करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) कराने और ब्याज दरों पर चर्चा कर बैंक अधिकारियों का भरोसा जीता गया। इसके बाद कंपनी की चेकबुक समाप्त होने का झांसा देकर ई-मेल के जरिए तत्काल भुगतान का अनुरोध किया गया। कंपनी के आधिकारिक ई-मेल से मिलते-जुलते पते और जाली लेटरहेड का उपयोग कर दूसरे खाते में 22,56,922 रुपये भेजने के निर्देश दिए गए। बैंक अधिकारियों पर तुरंत भुगतान का दबाव बनाकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम स्थानांतरित करवा ली गई। इस संबंध में केंद्रीय जिला साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

तकनीकी विश्लेषण से लोनी और नोएडा से हुई गिरफ्तारी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि स्थानांतरित की गई राशि पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में भेजी गई थी। फर्जी पहचान, फर्जी मोबाइल नंबर और भ्रामक ई-मेल का इस्तेमाल होने से आरोपियों तक पहुंचना जटिल था। पुलिस टीम ने दूरसंचार रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया। इसके आधार पर गाजियाबाद के लोनी निवासी विनय कुमार यादव (36) और नोएडा निवासी अनिल कुमार सहगल (65) को गिरफ्तार कर लिया गया।

छह अन्य मामलों से जुड़े तार, ठगी की रकम से खरीदा सोना

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गुरुग्राम, पलवल, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली और रोहिणी में दर्ज छह अन्य मामलों में भी इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाई थी। इन मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी और एक मामले में 88 लाख रुपये ट्रांसफर कराने का प्रयास शामिल है। गिरोह के तार पश्चिम बंगाल और बिहार में सक्रिय अन्य सहयोगियों से भी जुड़े होने के सुराग मिले हैं। पूछताछ में पता चला कि आरोपी ठगी की रकम से सोना खरीदते थे और नकदी निकालते थे।

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक कमलेश कुमार, सहायक उपनिरीक्षक पंकज यादव, हेड कांस्टेबल मनवीर सिंह, हेड कांस्टेबल शमीम, कांस्टेबल नितिन, महिला हेड कांस्टेबल सुनीता और महिला कांस्टेबल ललिता ने अहम भूमिका निभाई। पूरी जांच साइबर थाना प्रभारी योगराज दलाल की निगरानी और सहायक पुलिस आयुक्त (पहाड़गंज) शौरभ ए. नरेंद्र के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।

बैंकों और कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए पुलिस की सलाह

पुलिस ने बैंकों और व्यावसायिक संस्थानों को परामर्श दिया है कि किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर स्वतंत्र रूप से संपर्क कर पुष्टि जरूर करें। किसी अधिकारी के नाम पर बनाए गए दबाव या जल्दबाजी के चलते अनिवार्य दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रियाओं को नजरअंदाज न करें। संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या http://www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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