Kangra News: हिमाचल प्रदेश के रक्कड़ निवासी नेक राम और उनके परिवार द्वारा 13 करोड़ रुपये की जमीन खरीद का मामला अब केंद्रीय एजेंसियों के पास जाएगा। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने घोषित आय और जमीन खरीद में बड़ा अंतर पकड़ा है। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट आयकर विभाग और ईडी को भेजी जा रही है।
घोषित आय और जमीन खरीद में मिला भारी अंतर
विजिलेंस ने वर्ष 2011 से 2025 के बीच धर्मशाला और पालमपुर तहसील में खरीदी गई संपत्तियों की गहन पड़ताल की है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2011-12 में नेक राम की घोषित वार्षिक आय महज 2.08 लाख रुपये थी, जबकि उसी वर्ष 48.50 लाख रुपये की भूमि खरीद दर्ज की गई थी।
इसी तरह वर्ष 2025-26 के आयकर रिटर्न में 12.04 लाख रुपये की आय दिखाई गई, लेकिन परिवार के नाम 48.44 लाख रुपये की जमीन खरीदी गई। बैंक खातों की पड़ताल में भी भारी विसंगतियां मिली हैं। अधिकारियों को अंदेशा है कि जमीन सौदों के लिए किसी तीसरे पक्ष द्वारा बेहिसाब धन उपलब्ध कराया गया था।
सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का आरोप
मामले में केवल वित्तीय अनियमितताएं ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का गंभीर आरोप भी शामिल है। गलत म्यूटेशन दर्ज कर मंगला देवी का नाम काबिजान गैर-मरूसी के रूप में दर्ज कराया गया, जिससे राज्य सरकार के राजस्व को सीधा और भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
विजिलेंस की एफआईआर में तत्कालीन तहसीलदार अमर सिंह, कानूनगो वीरेंद्र कुमार, पटवारी मनीष कुमार, नेक राम और उनकी पत्नी किरण बाला समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है। ब्यूरो का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर संलिप्त पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।