Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2018 में आरक्षण विवाद से जुड़ी राज्य सरकार की चार विशेष अपीलें खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ के इस फैसले से प्रभावित सैकड़ों अभ्यर्थियों के चयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सफल होने वाले याचियों को वित्तीय लाभ वास्तविक नियुक्ति की तिथि से ही मिलेगा; उन्हें पिछली तारीख से वेतन या वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि 14 जनवरी 2018 को नागरिक पुलिस (सिविल पुलिस) के 23,520 और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) के 18,000 पदों सहित कुल 41,520 कांस्टेबल पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इस परीक्षा की अंतिम चयन सूची 18 फरवरी 2019 को जारी की गई थी।
कटऑफ से अधिक अंक के बावजूद चयन से बाहर करने का आरोप
मामले में याचिकाकर्ता अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के अभ्यर्थी थे, जिन्होंने ओबीसी महिला, ओबीसी पूर्व सैनिक और ओबीसी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित उपश्रेणियों में आरक्षण का दावा किया था। याचियों का तर्क था कि लिखित और दक्षता परीक्षा में उनके प्राप्तांक संबंधित अनारक्षित (सामान्य) वर्ग की महिला, पूर्व सैनिक और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों के कटऑफ अंकों से अधिक थे।
याचियों का आरोप था कि नियमों के विपरीत उन्हें अनारक्षित वर्ग में समायोजित करने के बजाय केवल ओबीसी उपश्रेणी तक सीमित रखा गया, जिसके कारण वे चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। इसी प्रकार की राहत अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के कुछ अभ्यर्थियों ने भी मांगी थी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट की नियुक्ति और वित्तीय लाभ की स्थिति
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार की विशेष अपीलों को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो कटऑफ से अधिक अंक लाने के बाद भी तकनीकी व्याख्या और आरक्षण वर्गीकरण के चलते नियुक्ति से वंचित रह गए थे।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि इन सफल अभ्यर्थियों को सेवा और वेतन संबंधी सभी वित्तीय परिलाभ उनके कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से ही देय होंगे।