New Delhi News: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में चीनी की खुदरा कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। पिछले एक महीने में चीनी 48.18 रुपये से बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने तीन-स्तरीय कार्ययोजना लागू की है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट और 10 लाख टन का आयात
कीमतों पर रोक लगाने के लिए कारोबारियों पर 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक सीमा लगाई गई है। पहली सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। बाजार में तत्काल आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने जा रही है।
उत्पादन में गिरावट और वैश्विक बाजार में कमी की मुख्य वजहें
गन्ने में रेड रॉट रोग और भारी बारिश के चलते चालू सत्र में चीनी उत्पादन 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह गया है। वैश्विक बाजार में भी 33 लाख टन की कमी का अनुमान है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। घरेलू मांग पूरी करने के लिए आपूर्ति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरकार ने एथनॉल नीति का किया बचाव, 15 अक्टूबर से पेराई शुरू
केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल नीति को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। सरकार के अनुसार, एथनॉल के लिए चीनी डायवर्जन घटकर केवल नौ प्रतिशत रह गया है और इसका अधिकांश उत्पादन अब मक्के से हो रहा है। त्योहारों में आपूर्ति सुधारने के लिए 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होगी।