New Delhi News: आर्थिक संकट से जूझ रही भारतीय एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट को खरीदने या उसमें बड़ा निवेश करने की तैयारी चल रही है। गल्फ की एक प्रमुख एयरलाइन ने इसके लिए शुरुआती ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया पूरी की है। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।
सूत्रों के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि विदेशी एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदेगी या पूरी कंपनी का अधिग्रहण करेगी। इस संबंध में स्पाइसजेट से सवाल पूछे गए थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक एयरलाइन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
द्विपक्षीय उड़ान अधिकार बने निवेश का मुख्य आकर्षण
एविएशन सेक्टर के जानकारों का मानना है कि गल्फ एयरलाइन की इस दिलचस्पी की मुख्य वजह भारत और खाड़ी देशों के बीच द्विपक्षीय उड़ान अधिकार हैं। भारतीय एयरलाइन का मालिकाना हक मिलने से विदेशी कंपनी को बेहद आकर्षक और लाभदायक अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर रणनीतिक पहुंच हासिल करने का बड़ा मौका मिल सकता है।
निवेशक एयरलाइन के बेड़े में भी बोइंग 737 विमान शामिल हैं, ठीक स्पाइसजेट की तरह। दोनों कंपनियों के जहाजों की इस समानता से उड़ानों के संचालन, विमानों के रखरखाव और परिचालन लागत के स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में कंपनी के खर्चों में काफी कमी आ सकती है।
भारी कर्ज और घाटे से जूझ रही स्पाइसजेट
भारत और खाड़ी देशों के बीच उड़ानों की भारी मांग है, लेकिन सीमित द्विपक्षीय समझौतों के चलते विदेशी कंपनियों को अतिरिक्त अधिकार नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में किसी भारतीय कंपनी का अधिग्रहण करना गल्फ एयरलाइंस के लिए काफी फायदेमंद सौदा साबित हो सकता है। इससे उन्हें सीधे तौर पर बड़ा बाजार मिल जाएगा।
स्पाइसजेट की बैलेंस शीट पर फिलहाल 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी घाटा और बड़ी देनदारियां हैं। हालांकि, हाल ही में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट और कई समझौतों के निपटारे से वित्तीय सुधार हुआ है। इन सकारात्मक कदमों की वजह से कंपनी की नेट वर्थ एक बार फिर पॉजिटिव हो गई है।