Moscow News: रूस ने अमेरिका के लिए लगभग 40 हजार मीट्रिक टन डीजल लेकर जाने वाला पहला टैंकर रवाना करने की तैयारी कर ली है। रूसी उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने इसकी पुष्टि की है। यह आपूर्ति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुए हालिया समझौते के तहत की जा रही है।
यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रिफाइनरियों को हुए नुकसान के बाद रूस ने नौ अक्टूबर को डीजल निर्यात पर रोक लगा दी थी। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों को थामने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधी बातचीत की। ट्रंप के विशेष अनुरोध पर राष्ट्रपति पुतिन ने इस प्रतिबंध को हटाते हुए आपूर्ति को हरी झंडी दी।
प्रतिबंधों के बीच ईंधन की खरीद पर अंतरराष्ट्रीय विवाद
यूक्रेन युद्ध के बाद लागू पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए किए गए इस सौदे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। यूक्रेन और कई यूरोपीय देशों ने इस व्यापारिक समझौते की कड़ी आलोचना की है। भारत समेत कई वैश्विक शक्तियों के लिए भी यह फैसला बेहद चौंकाने वाला साबित हुआ है।
अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ईंधन के दाम नियंत्रित करने के लिए ट्रंप ने रूस से 3 लाख टन डीजल तुरंत भेजने की मांग रखी थी। इसके बाद नवंबर तक 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल मंगाने की योजना पर सहमति बनी है।
स्टीव विटकॉफ की पुतिन से मुलाकात और तेल की कीमतें
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति पुतिन से सीधी बातचीत की और निर्यात बहाली के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक के दौरान पुतिन ने बताया कि दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतों में पांच से छह प्रतिशत तक गिरावट आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वाशिंगटन और मॉस्को के बीच कम होती कड़वाहट और यूक्रेन से बढ़ती दूरी का साफ संकेत है। इसी कूटनीतिक बदलाव के बीच अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद में भी कमी किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।