Business News: लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा तेल टैंकरों पर किए गए हमलों से मध्य पूर्व संघर्ष का नया मोर्चा खुल गया है। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6.62 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार निकल गया है।
दूसरी तरफ वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। इस सप्ताह इसमें लगभग 12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा चुकी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि लाल सागर में शिपिंग गतिविधियां ठप रहती हैं, तो कच्चा तेल जल्द ही 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और सप्लाई संकट का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लाल सागर में जहाजों पर हमले जारी रहने पर ईरान और हूती दोनों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित हुई है।
सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हूती हमलों ने वैश्विक कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के परिवहन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कजाकिस्तान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र, रूस के काला सागर तट स्थित कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल पर हुए हमलों ने भी सप्लाई चेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था और विभिन्न सेक्टरों पर संभावित असर
ऑटो और ट्रांसपोर्ट: कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इससे लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और एफएमसीजी (FMCG) सामान की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।
एविएशन और पेट्रोकेमिकल्स: विमान ईंधन (ATF) महंगा होने से एयरलाइंस कंपनियों का मार्जिन प्रभावित होगा और हवाई किराया बढ़ सकता है। वहीं पेंट, प्लास्टिक, केमिकल और सिंथेटिक टेक्सटाइल उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ेगी।
खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर: डीजल महंगा होने से सिंचाई और ट्रैक्टर संचालन का खर्च बढ़ेगा, जिससे कृषि लागत में वृद्धि होगी। इसके साथ ही सीमेंट, स्टील और बिटुमेन महंगा होने से इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क निर्माण परियोजनाओं का बजट बढ़ सकता है।