दिल्ली के बाद अब झारखंड में रैली करेंगे राहुल गांधी, झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने बनाई साझा रणनीति

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Ranchi News: दिल्ली में 1 नवंबर को हुई विपक्ष की रैली के बाद झारखंड में झामुमो और कांग्रेस गठबंधन ने अपने साझा संघर्ष को तेज करने का फैसला किया है। झारखंड कांग्रेस के अनुसार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और जल्द ही राहुल गांधी की एक बड़ी रैली आयोजित होगी। दूसरी ओर भाजपा ने इस पर तंज कसा है।

दिल्ली में 1 नवंबर को आयोजित राहुल गांधी की रैली के बाद झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस गठबंधन ने एकजुटता का दावा किया है। गठबंधन का मानना है कि दिल्ली के आयोजन से विपक्षी एकता को मजबूती मिली है और इसका सकारात्मक प्रभाव झारखंड में भी देखने को मिलेगा। दोनों दलों ने आने वाले दिनों में साझा रणनीति के तहत राज्यभर में आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा विरोध: कांग्रेस

झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने गठबंधन की भावी रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि गठबंधन का संघर्ष रुकने वाला नहीं है। जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक झारखंड में भी विरोध प्रदर्शन पूरी मजबूती से जारी रहेगा।

राकेश सिन्हा ने आगे जानकारी दी कि बहुत जल्द झारखंड में राहुल गांधी की एक विशाल और प्रभावी रैली आयोजित की जाएगी। उनका दावा है कि इस रैली से न केवल गठबंधन को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि राज्य में विपक्षी एकता और ज्यादा सशक्त होकर उभरेगी।

हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर झामुमो को भरोसा

झामुमो ने भी दिल्ली रैली के बाद गठबंधन के मजबूत होने की बात दोहराई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बदलाव की लहर चल पड़ी है। झामुमो का दावा है कि झारखंड में गठबंधन के पास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जैसा कद्दावर और जनप्रिय चेहरा है, जिसके सामने भारतीय जनता पार्टी के पास राज्य में मुकाबला करने के लिए उस कद का कोई नेता नहीं है। पार्टी का मानना है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक समीकरण और ज्यादा मजबूत होगा।

भाजपा का गठबंधन की एकजुटता पर पलटवार

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने झामुमो और कांग्रेस के गठबंधन पर तीखा तंज कसा है। भाजपा ने सवाल उठाया कि दोनों दल आखिर किस एकजुटता की बात कर रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि रामलीला मैदान के मंच पर झामुमो को किस तरह का सम्मान मिला, यह सबके सामने आ चुका है, जहां पार्टी के नेताओं को उचित स्थान तक नहीं मिला। इसके अलावा झामुमो ने अपने कार्यकर्ताओं को भी दिल्ली नहीं भेजा, जो इस गठबंधन के अंतर्विरोध और कमजोर स्थिति को उजागर करता है।

बहरहाल, दिल्ली के बाद अब सभी की निगाहें राहुल गांधी के प्रस्तावित झारखंड दौरे और विपक्षी दलों के साझा कार्यक्रमों पर टिकी हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ना तय माना जा रहा है।

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