Hyderabad News: आईटी सेक्टर में लंबे कामकाजी घंटों और अत्यधिक दबाव को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हैदराबाद में कार्यरत एक फ्रेशर ने 12.5 घंटे की शिफ्ट के बाद सिस्टम बंद करने पर सीनियर द्वारा लगाई गई फटकार की आपबीती साझा की। गुस्से में जवाब देने के बाद अब कर्मचारी को नौकरी जाने का डर सता रहा है।
आईटी उद्योग में काम के अत्यधिक घंटे और समयसीमा का दबाव अक्सर चर्चा में रहता है। ऐसा ही एक ताजा मामला हैदराबाद से सामने आया है, जहां एक आईटी फ्रेशर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी परेशानी साझा करते हुए कॉर्पोरेट कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पांच महीने पहले कंपनी से जुड़े इस कर्मचारी ने बताया कि एक प्रोजेक्ट में आई तकनीकी खराबी को ठीक करने के लिए उसने अपने वीकेंड और सोमवार की देर रात तक काम किया। इसके बाद अगले दिन भी उसने सुबह 10 बजे से लेकर रात 10:30 बजे तक करीब 12.5 घंटे लगातार काम किया और क्लाइंट की जरूरतें पूरी करने के बाद सिस्टम बंद कर दिया।
सिस्टम बंद करते ही सीनियर की फटकार
कर्मचारी के अनुसार, जैसे ही उसने लॉग-आउट किया, क्लाइंट की ओर से एक छोटी समस्या को लेकर मैसेज आया। चूंकि वह उस समय उपलब्ध नहीं था, इसलिए उसके सीनियर ने नाराजगी जताते हुए उसे जमकर फटकार लगाई और पूछा कि बिना सूचना दिए लॉग-आउट क्यों किया।
लगातार कई दिनों की थकान और साढ़े बारह घंटे की शिफ्ट के बाद इस रवैये से आहत होकर फ्रेशर ने सीनियर को जवाब दिया, “मैं क्लाइंट के काम को अपने खाने, नहाने, सोने और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं रख सकता। मुझे किसी न किसी स्तर पर लॉग-ऑफ करके कुछ घंटों का ब्रेक लेना ही होगा। अगर आपकी मुझसे 24 घंटे काम करने की अपेक्षा है, तो मुझे खेद है।”
प्रोजेक्ट छिनने और करियर प्रभावित होने की चिंता
गुस्से में प्रतिक्रिया देने के बाद अब उक्त कर्मचारी गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है। उसने अपनी पोस्ट में लिखा, “क्रोध शांत होने पर मुझे अहसास हुआ कि शायद मैंने अपना करियर दांव पर लगा दिया है। वह सीनियर विभाग के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं और उन्होंने मुझसे यह बड़ा प्रोजेक्ट वापस लेने की चेतावनी दी है। इस डर की वजह से मुझे रात में नींद भी नहीं आ रही है।”
सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कार्य संस्कृति और पेशेवर व्यवहार को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने युवा कर्मचारी के मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन करते हुए कहा कि कंपनियों को ओवरटाइम के लिए अतिरिक्त भुगतान या अवकाश देना चाहिए। वहीं, कुछ अनुभवी पेशेवरों ने सलाह दी कि आधिकारिक संवाद में कभी भी भावुक या आक्रामक नहीं होना चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में व्यक्तिगत बातचीत से विवाद सुलझाने और संचार को पेशेवर बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।