देवभूमि हिमाचल प्रदेश के 30 मंदिरों में जमा हुआ 625 किलो सोना, इन शक्तिपीठों के पास है सबसे ज्यादा संपत्ति

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा देखने को मिल रही है। राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों ने भारी मात्रा में सोना और चांदी दान किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 30 प्रमुख मंदिरों की तिजोरियों में अब तक कुल 6.25 क्विंटल सोना जमा हो चुका है।

मातृ शक्ति को समर्पित इन पावन धामों में केवल सोना ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में चांदी भी चढ़ाई गई है। वर्तमान में इन मंदिरों के पास लगभग 254 क्विंटल चांदी का विशाल भंडार मौजूद है। वर्ष 2025 के दौरान भी श्रद्धालुओं ने 10.858 किलो सोना और 9.15 क्विंटल से अधिक चांदी अर्पित की थी।

किस मंदिर के पास है सबसे ज्यादा सोना

ऊना जिले का प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर सोना-चांदी के मामले में सबसे आगे है। मंदिर प्रबंधन के पास लगभग 2.17 क्विंटल सोना और 82 क्विंटल चांदी जमा है। वहीं बिलासपुर का नैना देवी मंदिर दूसरे स्थान पर है, जहां 2.10 क्विंटल सोना और करीब 89.35 क्विंटल चांदी का दान दर्ज किया गया है।

कांगड़ा के ऐतिहासिक ज्वालाजी मंदिर में श्रद्धालुओं ने करीब 50 किलो सोना और 20 क्विंटल से अधिक चांदी दान की है। इसके अतिरिक्त कांगड़ा के बज्रेश्वरी देवी मंदिर में 37 किलो सोना और 15.45 क्विंटल चांदी जमा है। हमीरपुर स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर के पास 30 किलो सोना और 3.82 क्विंटल चांदी मौजूद है।

सिरमौर के माता बालासुंदरी मंदिर में 18 किलो सोना तथा 29.71 क्विंटल चांदी जमा हो चुकी है। कांगड़ा के चामुंडा देवी मंदिर में भक्तों ने 20 किलो सोना और 7.82 क्विंटल चांदी अर्पित की है। राज्य के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों में भी बड़ी मात्रा में बहुमूल्य धातुओं का चढ़ावा लगातार प्राप्त हो रहा है।

तीन वर्षों में मिला करोड़ों रुपये का नकद चढ़ावा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने लिखित आंकड़े प्रस्तुत किए। सरकार ने बताया कि राज्य के नियंत्रण वाले 36 प्रमुख मंदिरों को पिछले तीन वर्षों में कुल 419.88 करोड़ रुपये से अधिक का नकद दान मिला है।

वर्ष 2024 में 153.32 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 में 157.51 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ था। वहीं वर्ष 2026 में 1 अगस्त तक 109.04 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई। इस अवधि में हमीरपुर के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध को सबसे अधिक 99.19 करोड़ रुपये का दान मिला है।

नकद चढ़ावे की सूची में नैना देवी मंदिर 86.94 करोड़ रुपये के साथ दूसरे और ज्वालामुखी मंदिर 36.57 करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा महामाया बाला सुंदरी मंदिर को 26.99 करोड़, बज्रेश्वरी देवी मंदिर को 13.76 करोड़ और जाखू हनुमान मंदिर को 8.82 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है।

धार्मिक और सामाजिक कार्यों में होता है राशि का उपयोग

मंदिरों में प्राप्त इस विशाल आय का उपयोग हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था एवं पूर्त विन्यास अधिनियम, 1984 के तहत किया जाता है। इस फंड से तीर्थस्थलों का विकास, श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं, लंगर व्यवस्था, सुरक्षा, बिजली और पीने के पानी जैसे महत्वपूर्ण प्रबंध किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त इस राशि से मंदिर कर्मचारियों के वेतन, सफाई व्यवस्था, पार्किंग, शिक्षण संस्थानों और गौशालाओं का संचालन किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय मेलों के आयोजन पर भी इस बजट को नियमानुसार खर्च किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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