भगवान श्रीकृष्ण और कामधेनु गाय बहुला की अद्भुत कथा, जानिए भाद्रपद मास की चतुर्थी के व्रत का महत्व

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Mathura News: हिंदू धर्म में बहुला चौथ का फेस्टिवल वात्सल्य और सत्यनिष्ठा का महान सिंबल माना जाता है। भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह खास फास्ट रखा जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण और उनकी फेवरेट कामधेनु गाय बहुला के बीच हुए एक बेहद मार्मिक डायलॉग को समर्पित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण की गौशाला में बहुला नाम की एक कामधेनु गाय थी। यह गाय भगवान कृष्ण को बहुत ज्यादा प्रिय थी। एक बार उन्होंने अपनी इस फेवरेट गाय का टेस्ट लेने का फैसला किया। जब बहुला जंगल में घास चरने गई, तब भगवान कृष्ण ने भयानक शेर का रूप धारण कर लिया।

शेर का रूप धारण करके श्रीकृष्ण ने कामधेनु गाय पर अचानक अटैक कर दिया। इस खूंखार शेर को देखकर बहुला गाय बहुत ज्यादा डर गई। अपनी लाइफ बचाने के लिए वह शेर से लगातार रिक्वेस्ट करने लगी। लेकिन उस शेर ने बहुला की एक भी बात नहीं सुनी और शिकार करने पर अड़ा रहा।

शेर से किए प्रॉमिस को पूरा करने लौटी बहुला

आखिरकार बहुला ने शेर से कहा कि उसका छोटा बछड़ा भूखा होगा। वह अपने बच्चे को दूध पिलाकर अगले दिन वापस आ जाएगी। तब शेर उसे अपना शिकार बना सकता है। गाय का यह वात्सल्य देखकर शेर को दया आ गई। उसने बहुला को अपने बछड़े के पास जाने की परमिशन दे दी।

अगले दिन अपने प्रॉमिस को पूरा करते हुए बहुला वापस उसी शेर के पास आ गई। गाय की इस कमिटमेंट को देखकर श्रीकृष्ण बहुत खुश हुए। उन्होंने अपने असली रूप में आकर बहुला को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भाद्रपद मास की चतुर्थी पर तुम्हारी हमेशा स्पेशल पूजा की जाएगी।

भगवान श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि इस पूजा को करने वाली महिलाओं को हमेशा संतान सुख मिलेगा। यही मेन रीजन है कि आज के दिन बहुत से ग्वाले अपनी गाय का दूध नहीं निकालते हैं। वह सारा दूध गाय के छोटे बछड़े के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि उसे उसका हक मिल सके।

Desh Raj
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