नेपाल में ग्लेशियर टूटने से 100 किमी तक मची भयंकर तबाही, ‘इनलैंड सुनामी’ के बाद भारत के गंडक बैराज पर हाई अलर्ट

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Rasuwa News: नेपाल-चीन बॉर्डर पर 26 अगस्त को ग्लेशियर ढहने से भयानक बाढ़ आ गई। करीब 100 किलोमीटर तक नदियों के रास्ते दौड़े इस सैलाब ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली। त्रिशूली नदी में आई इस ‘इनलैंड सुनामी’ के बाद पानी भारत के बिहार स्थित गंडक बैराज तक पहुंच गया है।

नेपाल समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर भूकंपीय घटना दर्ज हुई। यूएसजीएस के मुताबिक लैंगटांग नेशनल पार्क में हुए इस ग्लेशियर लैंडस्लाइड की ऊर्जा 5.2 तीव्रता के बराबर थी। ग्लेशियर के मलबे से बनी झील टूटने से चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट पूरी तरह तबाह हो गया।

193 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ा सैलाब, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट ठप

सैलाब ल्हेंदे खोला, भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों से होकर गुजरा। शुरुआती 22 किलोमीटर में बहाव की गति 193 किमी प्रति घंटा रही, जिससे त्रिशूली नदी का जलस्तर 30 मिनट में 9 मीटर बढ़ गया। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में भारी तबाही मची और नेपाल की 12 प्रतिशत बिजली क्षमता वाले 10 हाइड्रो प्रोजेक्ट्स बंद हो गए।

बिहार के गंडक बैराज के सभी 36 गेट खुले, यूपी में मिले सात शव

बाढ़ का पानी नारायणी नदी से होकर बिहार के वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज पहुंचा। डिस्चार्ज 1.50 लाख क्यूसेक पहुंचने पर बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए। वहीं उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में अलर्ट जारी किया गया है, जहां नदी से बहकर आए सात शव बरामद किए गए हैं।

Desh Raj
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