Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के उद्योगों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट फैसला सुनाया है कि बिजली कटौती के समय अपने उपयोग के लिए उत्पन्न की गई बिजली पर राज्य सरकार टैक्स नहीं लगा सकती। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने बिजली ड्यूटी अधिनियम की संबंधित धारा को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मैसर्ज रुचिरा पेपर्ज लिमिटेड की याचिका पर यह फैसला दिया। कंपनी ने डीजल जेनरेटर से पैदा की गई बिजली पर बिजली ड्यूटी लगाने के कानून को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद हिमाचल प्रदेश बिजली (ड्यूटी) अधिनियम, 2009 की धारा 3(1)(xi) को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। कंपनी ने बताया कि वह बिजली कटौती के कारण मजबूरी में डीजल जेनरेटर का उपयोग करती है। डीजल से बिजली बनाना आम बिजली से तीन गुना महंगा पड़ता है। ऐसे में 1 सितंबर 2023 को बिजली ड्यूटी 30 पैसे से बढ़ाकर 45 पैसे प्रति यूनिट करना पूरी तरह से गलत था।
दूसरी तरफ राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना तर्क पेश किया। सरकार ने कहा कि डीजल जेनरेटर से प्रदूषण फैलता है। इस टैक्स का उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए सरकार के इन तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार बिजली ड्यूटी केवल आपूर्ति या व्यावसायिक बिक्री पर ही लगाई जा सकती है। जब कोई उपभोक्ता स्वयं के उपयोग के लिए बिजली बनाता है, तो वह न बिजली खरीद रहा है और न ही बेच रहा है। इसलिए ऐसी स्थिति में टैक्स लगाना पूरी तरह से गलत है। कोर्ट के इस निर्णय से राज्य के हजारों उद्योगों को बड़ी राहत मिली है।