लोकसभा में ‘कराधान संशोधन विधेयक 2026’ पारित, सरकार को यूपीआई पर शुल्क लगाने का मिलेगा अधिकार

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New Delhi News: लोकसभा ने विपक्षी हंगामे के बीच ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ को बिना चर्चा के पारित कर दिया। यह विधेयक सरकार को बैंकों और सेवा प्रदाताओं को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार प्रदान करता है।

डिजिटल भुगतान पर एमडीआर हटाने का कानूनी प्रावधान

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य उस मौजूदा प्रावधान को समाप्त करना है, जो बैंकों को डिजिटल भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लगाने से रोकता है। संशोधन का मकसद बैंकों और भुगतान प्रदाताओं के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल बनाना है, ताकि डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।

आरबीआई गवर्नर ने कहा- सेवा की लागत का भुगतान जरूरी

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि डिजिटल भुगतान के सार्वजनिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए निवेश आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘यूजर पेज’ मॉडल के तहत सेवा का उपयोग करने वालों से शुल्क लिया जाए या फिर आम जनता करों के माध्यम से इसकी भरपाई करे, लागत तो चुकानी ही होगी।

छोटे व्यवसाय और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा प्रभाव

वर्तमान में यूपीआई लेनदेन शुल्क मुक्त हैं, जबकि आरटीजीएस और एनईएफटी पर सेवा शुल्क लगता है। नए बदलावों के तहत सरकार एक निश्चित सीमा से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर शुल्क लागू कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले भुगतान इससे मुक्त रह सकते हैं।

Desh Raj
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