Delhi News: भारत में लिवर की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। बेहतर इलाज और वैक्सीनेशन की मदद से हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में तो कमी आई है, लेकिन फैटी लिवर और शराब के कारण होने वाली बीमारियां अब गंभीर रूप ले रही हैं।
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार लगभग 38 प्रतिशत भारतीय फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें लगभग 35 प्रतिशत बच्चे भी शामिल हैं। वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे पर डॉक्टरों ने बताया कि खराब लाइफस्टाइल देश में एक नई बीमारी को जन्म दे रही है।
हेपेटाइटिस दरअसल लिवर की सूजन है जो वायरस, शराब, दवाओं या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण हो सकती है। हेपेटाइटिस ए और ई कम समय के लिए होते हैं। लेकिन हेपेटाइटिस बी और सी से सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव बना मुख्य कारण
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग ने बताया कि देश में लिवर की बीमारियों का पैटर्न बदल रहा है। मोटापा, डायबिटीज और सुस्त लाइफस्टाइल के कारण फैटी लिवर की समस्या आम हो रही है। इस बीमारी को ऑफिशियली एमएएसएलडी नाम से जाना जाता है।
राहत की बात यह है कि फैटी लिवर को रोका जा सकता है। अगर शुरुआत में ही इसका पता चल जाए तो इसे पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में 304 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं।
दुनिया भर के वायरल हेपेटाइटिस मामलों में भारत का हिस्सा 12 प्रतिशत है। देश में लगभग 40 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और 6 से 12 मिलियन लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं। शराब लिवर सिरोसिस के 43 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है।
बचाव और सही खानपान है बेहद जरूरी
एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि हेपेटाइटिस बी का टीका यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत जन्म के समय मुफ्त दिया जाता है। पहली खुराक के बाद दो और खुराक लेने पर 95 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा नई दवाओं पर भी रिसर्च जारी है।
अक्सर लिवर की बीमारी के लक्षण शुरुआती स्टेज में दिखाई नहीं देते। जब रूटीन ब्लड टेस्ट में एंजाइम बढ़े हुए मिलते हैं, तब बीमारी का पता चलता है। त्वचा का पीला पड़ना, गहरा पेशाब, अत्यधिक थकान, भूख न लगना और वजन कम होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज करें। चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और पैकेज्ड फूड से परहेज करें। फलों के जूस की जगह साबुत फल खाएं और आहार में फाइबर, दालें, सब्जियां और नट्स शामिल करके लिवर को सुरक्षित रखें।