Chandigarh News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के लाहौर जाने की इच्छा पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यदि वह आना चाहते हैं तो वीजा आवेदन पर विचार किया जाएगा। हालांकि, सीमावर्ती राज्य के मुख्यमंत्री की इस संभावित विदेश यात्रा के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से राजनीतिक व प्रशासनिक मंजूरी मिलना अनिवार्य है।
लाहौर में आयोजित होने जा रही ‘वर्ल्ड पंजाबी कॉन्फ्रेंस’ में शामिल होने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ओर कूटनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री मान ने इस सम्मेलन में हिस्सा लेने की इच्छा व्यक्त करते हुए यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें सीमा पार जाने की अनुमति मिलेगी। अब इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान सम्मेलन में शामिल होना चाहते हैं, तो उनके वीजा आवेदन पर विचार किया जाएगा। इससे पहले 23 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से इस निमंत्रण का उल्लेख किया था और साझा संस्कृति व भाषाई जुड़ाव के आधार पर अपनी भागीदारी की मंशा जताई थी।
केंद्र सरकार की राजनीतिक मंजूरी क्यों है अनिवार्य?
पाकिस्तान की ओर से वीजा पर विचार करने की बात कहे जाने के बावजूद इस यात्रा का भविष्य नई दिल्ली की मंजूरी पर निर्भर करता है। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के नियमों के तहत किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री या उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को किसी भी आधिकारिक विदेश दौरे पर जाने से पहले केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) से ‘पॉलिटिकल क्लीयरेंस’ (राजनीतिक मंजूरी) और गृह मंत्रालय से आवश्यक सुरक्षा मंजूरी लेना आवश्यक होता है।
सीमावर्ती राज्य और सुरक्षा के रणनीतिक पहलू
भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर में रहे हैं। पंजाब एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती राज्य है, जिसके चलते वहां के मुख्यमंत्री की यात्रा केवल एक सांस्कृतिक या साहित्यिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं मानी जाती। इसके पीछे कई रणनीतिक, सुरक्षा और प्रशासनिक आयाम जुड़े होते हैं। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा सकारात्मक संकेत दिए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री भगवंत मान के लाहौर जाने या न जाने का अंतिम निर्णय भारत सरकार की समीक्षा और औपचारिक अनुमति के बाद ही संभव हो सकेगा।