Dehradun News: महंगाई और सोने-चांदी के रिकॉर्ड दामों के बावजूद धनतेरस पर देहरादून के बाजारों में रिकॉर्ड खरीदारी देखने को मिली। पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के अनुसार, इस बार दून में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ, जो पिछले साल के 600 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी अधिक है। सराफा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और बर्तन बाजारों में देर रात तक ग्राहकों की भारी भीड़ रही।
धनतेरस के पावन अवसर पर देहरादून के प्रमुख बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी रही। सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों और सामान्य महंगाई का असर ग्राहकों के उत्साह पर नहीं दिखा। सर्राफा से लेकर ऑटोमोबाइल और घरेलू सामान के बाजारों में जमकर कारोबार हुआ, जिससे दीपावली से पहले ही स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खिल गए।
पीएचडी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के वाइस चेयरमैन राजीव घई के आकलन के अनुसार, इस साल धनतेरस पर देहरादून में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 600 करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान जताया गया था। इस प्रकार चालू वर्ष में व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
सराफा बाजार में रही भारी चमक
सोने और चांदी के लगातार बढ़ते दामों के बीच भी आभूषणों की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों का तांता लगा रहा। ग्राहकों ने अपने बजट के हिसाब से हल्के और भारी आभूषण खरीदे। इसके अलावा चांदी के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और पूजा के बर्तनों की भी जबरदस्त मांग रही। खरीदारों को लुभाने के लिए ज्वेलर्स ने हल्के वजन वाले आभूषणों के साथ कई आकर्षक ऑफर्स और विशेष डिजाइन पेश किए थे।
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स में जमकर बिक्री
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी धनतेरस पर भारी उछाल देखा गया। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पहले से बुकिंग करा चुके ग्राहक शुभ मुहूर्त में गाड़ियों की डिलीवरी लेने पहुंचे, जिससे शोरूमों में दिनभर गहमागहमी बनी रही।
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बड़ी स्क्रीन के टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और अन्य आधुनिक घरेलू उपकरणों की अच्छी बिक्री दर्ज की गई।
परंपरागत बर्तन बाजार में भी उत्साह
बर्तन बाजार में पारंपरिक तांबे, पीतल और स्टील के बर्तनों के साथ-साथ चांदी के बर्तनों के प्रति भी खरीदारों का गहरा आकर्षण दिखा। इस बार खरीदारी केवल शगुन और छोटे सामान तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों ने अपनी जरूरतों के बड़े और महंगे सामान की भी खुलकर खरीदारी की। बाजारों में देर रात तक बनी इस रौनक ने आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार दी है।