अंतरिक्ष में शीशे लगाकर रात में धूप बेचने की तैयारी में अमेरिकी स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

Share

- Advertisement -

California News: अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित स्पेस स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने रात के समय पृथ्वी पर जरूरत के अनुसार धूप उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। कंपनी अंतरिक्ष में विशाल दर्पण स्थापित कर रात में सोलर फार्मों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक रोशनी पहुंचाने का दावा कर रही है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया है।

अमेरिकी स्पेस स्टार्टअप रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल अंतरिक्ष आधारित तकनीक की मदद से धूप को ‘ऑन-डिमांड’ सेवा में बदलने की तैयारी कर रहा है। कैलिफोर्निया स्थित इस कंपनी की योजना अंतरिक्ष में विशाल शीशे (दर्पण) स्थापित करने की है, जो रात के समय भी सूरज की किरणों को परावर्तित करके धरती के लक्षित क्षेत्रों तक पहुंचा सकें। कंपनी का मानना है कि इससे सोलर फार्म रात में भी सौर ऊर्जा का उत्पादन जारी रख सकेंगे और आपदा के समय राहत व बचाव अभियानों में रोशनी की व्यवस्था आसानी से हो सकेगी।

पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किए जाएंगे विशाल दर्पण

परियोजना के तहत कंपनी 18×18 मीटर आकार के बड़े शीशों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में भेजने की तैयारी कर रही है। इन दर्पणों की दिशा और स्थिति को पृथ्वी से इस तरह नियंत्रित किया जाएगा कि सूर्यास्त के बाद भी चयनित क्षेत्रों में सूर्य का प्रकाश भेजा जा सके।

प्रारंभिक परीक्षण के दौरान उपयोग किए जाने वाले शीशों से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में रोशनी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। कंपनी इन उपग्रहों की स्थिति को निरंतर समायोजित करती रहेगी, जिससे निर्धारित शुल्क चुकाने वाले ग्राहकों को जरूरत के अनुसार धूप मिलती रहे। दीर्घकालिक योजना के तहत कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2035 तक ऐसे 50,000 सैटेलाइट अंतरिक्ष में स्थापित करने का है।

पर्यावरणविदों ने संभावित जोखिमों पर उठाई चिंता

योजना के व्यावसायिक और तकनीकी लाभों के बावजूद पर्यावरणविद और वैज्ञानिक इसे लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम रूप से रात के अंधेरे को उजाले में बदलने से प्राकृतिक चक्र, वन्यजीवों के जैविक तंत्र और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अंतरिक्ष में हजारों अतिरिक्त उपग्रहों की मौजूदगी से अंतरिक्षीय मलबे और खगोलीय प्रेक्षणों में व्यवधान की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।

Read more

Related News