Prayagraj News: प्रयागराज के नवाबगंज स्थित बरईपुर रामनगर गांव में पुलिस ने एक मकान में जमीन के नीचे दबाकर रखे गए तीन ड्रमों से भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। ड्रमों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। शुरुआती अनुमान के अनुसार बरामद नकदी 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है।
प्रयागराज जनपद के नवाबगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बरईपुर रामनगर गांव में पुलिस ने एक घर पर छापा मारकर जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से भारी मात्रा में नकदी बरामद की है। इन तीनों ड्रमों में 500 रुपये के नोटों के बंडल भरे हुए थे। पुलिस ने मौके से चार लोगों को हिरासत में लेकर संबंधित मकान को सील कर दिया है।
प्रारंभिक सूचना के अनुसार बरामद राशि 5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जबकि वास्तविक आंकड़े की पुष्टि के लिए आयकर विभाग की टीम नोट गिनने वाली मशीनों की मदद से गणना कार्य में जुटी है।
गुप्त सूचना पर 40 पुलिसकर्मियों ने की छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव के एक मकान में करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम छिपाकर रखी गई है। इस पर कार्रवाई करते हुए डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार और एडीसीपी के नेतृत्व में बुधवार शाम पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
कार्रवाई से पहले सुरक्षा के दृष्टिगत इलाके की बिजली कटवाई गई। इसके बाद 40 से अधिक पुलिसकर्मियों ने पूरे मकान की घेराबंदी कर ली। तलाशी अभियान के दौरान जब मकान के भीतर जमीन की खुदाई कराई गई, तो मिट्टी में दबाकर रखे गए तीन ड्रम बाहर निकले, जिनमें 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं।
मकान मालिक और हिरासत में लिए गए लोग
जिस मकान से यह नकदी बरामद हुई है, वह राकेश यादव उर्फ महाकाल का बताया जा रहा है। पुलिस ने राकेश समेत चार संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है।
स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के अनुसार, राकेश पूर्व में पुणे में काम करता था और वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान अपने दो जीजा और साढ़ू के साथ गांव लौटा था। गांव आने के बाद उसने जमीन और ट्रैक्टर आदि की खरीदारी शुरू की थी। बताया जा रहा है कि हाल ही में पड़ोसी से हुए विवाद के बाद मामले की भनक पुलिस तक पहुंची।
नकदी के स्रोत की जांच जारी
डीसीपी गंगापार सोनम कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम बरामद रकम के वास्तविक स्रोत और उसे बैंकों में रखने के बजाय जमीन के भीतर छिपाकर रखने के कारणों की जांच कर रही है। आयकर विभाग के अधिकारी भी वित्तीय लेन-देन और आय के स्रोतों के संबंध में जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। नकदी की पूरी गिनती समाप्त होने के बाद ही कुल राशि का आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा।