Shimla News: संजौली से भट्टाकुफर तक बन रही चलौंठी-संजौली-भट्टाकुफर ट्विन ट्यूब टनल के निर्माण से मकानों को हो रहे नुकसान के मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को नोटिस जारी कर पूछा है कि पूर्व की सतही राजमार्ग योजना को छोड़कर सुरंग बनाने का निर्णय क्यों लिया गया, जबकि इसके लिए लगभग 600 करोड़ रुपये का मुआवजा पहले ही बांटा जा चुका था।
600 करोड़ के मुआवजे और सार्वजनिक धन के नुकसान पर जवाब तलब
विनीत शर्मा एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एनएचएआई को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं कि सतही राजमार्ग के लिए अधिगृहीत भूमि और बांटे गए लगभग 600 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के नुकसान की भरपाई कौन करेगा और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सुरंग का निर्माण तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है।
याचिका के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-05 पर शिमला बाइपास की मूल योजना के तहत छकरेल, भट्टाकुफर और ढली से होकर सतही मार्ग बनना था। इसके लिए भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को करीब 600 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया और 88 परिवार विस्थापित हुए थे। इसके बाद एनएचएआई ने इस योजना को बदलकर ट्विन ट्यूब टनल बनाने का फैसला लिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होगी।
मकानों में दरारें और जीएसआई के दस्तावेज
अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और तस्वीरों के अनुसार, सुरंग का निर्माण घनी आबादी वाली पहाड़ी के नीचे किया जा रहा है, जिसके ऊपर सैकड़ों मकान बने हुए हैं। निर्माण कार्य के कारण कई भवनों में दरारें आ गई हैं और याचिकाकर्ताओं के मकानों को भी असुरक्षित घोषित कर दिया गया है।
याचिका के साथ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें पहाड़ी के नीचे सुरंग के निर्माण को लेकर पहले ही चेतावनी और परामर्श दिए जाने का जिक्र है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है।