कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का दूसरा दिन रहा खास: साहित्य, पर्यावरण और सैन्य विषयों पर हुए 20 सत्र, सतिंदर सरताज ने बांधा समां

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Solan News: कसौली में आयोजित 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को साहित्य, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित कुल 20 सत्रों में व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, सोनम वांगचुक और एएस दुलत सहित कई दिग्गज वक्ताओं ने अपने विचार रखे, जबकि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी आकर्षक बना दिया।

कसौली क्लब के परिसर में आयोजित इस प्रतिष्ठित साहित्यिक उत्सव के दूसरे दिन विभिन्न सत्रों में अलग-अलग मुद्दों पर मंथन हुआ। कसौली क्लब के टेरेस पर 11, बैडमिंटन हॉल में दो और युवाओं के लिए आयोजित ‘फॉरएवर यंग’ कार्यक्रम के तहत सात सत्र संपन्न हुए। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु नानक देव से जुड़ी एक संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुई।

हिमालयी पर्यावरण और सुरक्षा मामलों पर चर्चा

पर्यावरण के मोर्चे पर चिंता जताते हुए अवय शुक्ला, रवि चोपड़ा और सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र की पर्यावरणीय चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके अलावा, जनरल डॉ. मनोज नरवणे ने सैन्य जीवन के मिथकों और वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला। होइहनू हाउजेल ने मणिपुर की कहानियां साझा कीं, जबकि मेजर जनरल रंजन महाजन और पूर्व खुफिया प्रमुख एएस दुलत ने कश्मीर के मौजूदा हालातों पर विस्तार से चर्चा की। विष्णु सोम ने ‘स्काई वॉरियर्स’ और सार्थक आहूजा ने लिटफेस्ट के संस्थापकों से जुड़े संस्मरण साझा किए। युवाओं के सत्रों में ‘ग्रीन हीरोज’, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रश्नोत्तरी (क्विज़) विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

सतिंदर सरताज और संध्या मृदुल की प्रस्तुतियां

उत्सव के दौरान पंजाबी गायक सतिंदर सरताज और अभिनेत्री संध्या मृदुल की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन सांस्कृतिक आयोजनों ने लिटफेस्ट में चार चांद लगा दिए और दिन का समापन संगीत व नृत्य की सुंदर प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

कूटनीति और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: जनरल नरवणे

इससे पहले, शुक्रवार को कसौली क्लब में शुरू हुए 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट 2026 के उद्घाटन सत्र में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता, बल्कि राष्ट्रीय हित सबसे पहले आते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को चीन और पाकिस्तान सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने चाहिए।

देश में विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे पर उन्होंने समाज की तुलना प्रेशर कुकर से करते हुए कहा कि लोगों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना पूरी तरह से अराजनीतिक है और आगे भी ऐसी ही रहेगी। रक्षा क्षेत्र पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आयात पर निर्भरता घटाने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर जोर देना होगा तथा रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी एक सकारात्मक कदम है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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