Baddi News: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के नवीनतम ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश में निर्मित 95 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर असफल पाए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर फेल हुए कुल 331 सैंपलों में हिमाचल शीर्ष पर है। राज्य औषधि नियंत्रक ने संबंधित दवा कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रभावित बैचों की बिक्री पर रोक लगा दी है।
देश के प्रमुख फार्मा हब हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी ताजा मासिक ड्रग अलर्ट के अनुसार, राज्य की विभिन्न दवा निर्माण इकाइयों में तैयार की गईं 95 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हो गए हैं। पूरे देश में कुल 331 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें सबसे अधिक संख्या हिमाचल प्रदेश की है।
जांच रिपोर्ट में बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित कई प्रमुख दवा कंपनियों के नाम शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में सैंपल फेल होने से औद्योगिक इकाइयों में गुणवत्ता नियंत्रण और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
एंटीबायोटिक, सिरप और जीवनरक्षक दवाइयों के सैंपल फेल
जांच में असफल पाई गई दवाओं में दैनिक उपयोग की आवश्यक और जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक गोलियां, हृदय रोग की दवाएं, बुखार और दर्द निवारक गोलियां, खांसी के सिरप, पेट संबंधी विकारों की दवाइयां, आंखों की ड्रॉप्स, जीवनरक्षक इंजेक्शन और मल्टीविटामिन उत्पादों के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया कि कई दवाओं में शरीर के भीतर घुलने की क्षमता (डिसोल्यूशन) सही नहीं थी, कुछ में सक्रिय औषधीय तत्वों (API) की मात्रा तय मानकों से कम थी, जबकि कई दवाओं में रोगाणुरहित (स्टेरिलिटी) न होने जैसी गंभीर कमियां पाई गईं।
उत्तराखंड की 69 दवाओं के सैंपल भी असफल
देशभर के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिमाचल प्रदेश के बाद पड़ोसी राज्य उत्तराखंड दूसरे स्थान पर है, जहां की 69 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र की 23, मध्य प्रदेश की 22, हरियाणा की 21, राजस्थान की 17, गुजरात और तमिलनाडु की 15-15, तथा पंजाब की 13 दवाओं के नमूने भी गुणवत्ता जांच में विफल रहे हैं।
कंपनियों को कारण बताओ नोटिस, बाजार से बैच वापस मंगाने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य औषधि विभाग ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। हिमाचल प्रदेश के राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन कंपनियों के सैंपल मानकों पर फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इसके साथ ही बाजार में वितरित संबंधित दवाओं के प्रभावित बैचों की बिक्री और आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। डॉ. कपूर ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच पूरी होने के उपरांत औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत संबंधित दवा निर्माताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।