Shimla News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया है कि वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। राज्य सचिवालय में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने अस्पतालों में आधुनिक मशीनों की स्थापना, 30 हजार रुपये में रोबोटिक सर्जरी, डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि और आर्थिक सुधारों की जानकारी दी।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार के कड़े सुधारों और व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों से हिमाचल वर्ष 2030 तक स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में शीर्ष स्थान हासिल करेगा। राज्य सचिवालय शिमला में आयोजित एक विशेष पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सत्ता संभालने के बाद सरकार ने पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर काम शुरू किया है। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुधार शामिल हैं, जिन पर सुनियोजित तरीके से कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
अस्पतालों में एम्स स्तर की मशीनें और ‘जीरो वेटिंग’ पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मरीजों की बेहतर जांच के लिए वर्षों पुरानी एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों को हटाकर एम्स स्तर की अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य अस्पतालों में मेडिकल टेस्ट और जांच प्रक्रियाओं के लिए ‘जीरो वेटिंग’ व्यवस्था तैयार करना है, ताकि मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल सके। त्वरित और सटीक जांच से गंभीर बीमारियों का समय रहते पता चलेगा, जिससे उपचार में तेजी आएगी और आम जनता के धन की बचत होगी।
मेडिकल कॉलेजों में मात्र 30 हजार रुपये में रोबोटिक सर्जरी
स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़े तकनीकी बदलाव की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अब तक 600 से अधिक सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस रोबोटिक सर्जरी का खर्च सामान्यतः लगभग 1.20 लाख रुपये आता है, उसे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में मात्र 30 हजार रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिल रहा है।
2027 तक 70% स्टाफ का लक्ष्य और पीजी सीटों में 320 की बढ़ोतरी
विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के समय मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों व पैरा-मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता मात्र 35 प्रतिशत थी। वर्तमान सरकार ने डॉक्टरों की तैनाती को 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है और 2027 तक कुल स्टाफ को 70 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, लगभग चार दशकों बाद मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में 320 की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल सीटें बढ़कर 597 हो गई हैं। रेडियोग्राफर्स के पहले बैच के पासआउट होते ही उनकी कमी भी दूर कर ली जाएगी।
डॉक्टरों के भत्ते में दोगुनी वृद्धि, ड्यूटी घंटे घटाए
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को राहत देते हुए सरकार ने सीनियर रेजिडेंटशिप की राशि 65 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 1.30 लाख रुपये प्रति माह कर दी है। इसके साथ ही कार्य के अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए डॉक्टरों के ड्यूटी घंटे 48 से घटाकर 12 घंटे किए गए हैं। प्रशासनिक और चिकित्सीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी व सुचारु बनाने के उद्देश्य से सरकार ने स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (DHS) और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) कैडर को भी अलग-अलग कर दिया है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय
प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार अपने कार्यकाल में हिमाचल को आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने बताया कि गंभीर वित्तीय संकट और चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक के कार्यकाल में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। नई आबकारी नीति और प्रशासनिक सुधारों के चलते आबकारी राजस्व में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है।