Paris News: फ्रांस, इटली और अल्बानिया समेत यूरोप के लगभग नौ देशों में बेकाबू महंगाई, बेरोजगारी, आवास संकट और शिक्षा बजट में कटौती के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस और इटली के प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें दर्ज की गई हैं। बिगड़ते सामाजिक और आर्थिक हालात के कारण पूरे महाद्वीप में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
यूरोप के कई प्रमुख देशों में गहराते आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के विरोध में आम जनता सड़कों पर उतर आई है। फ्रांस और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों से लेकर अल्बानिया तक बड़े पैमाने पर जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। विश्लेषक महाद्वीप में उभरते इस असंतोष की तुलना करीब डेढ़ दशक पहले आई ‘अरब स्प्रिंग’ जैसी सामाजिक उथल-पुथल से कर रहे हैं।
वर्तमान में यूरोप के लगभग नौ देश इन विरोध प्रदर्शनों की चपेट में हैं। इनमें फ्रांस, इटली, बेल्जियम, स्पेन, पुर्तगाल, अल्बानिया, जर्मनी, ऑस्ट्रिया और ग्रीस शामिल हैं। इनमें फ्रांस, इटली और अल्बानिया में हालात सबसे अधिक संवेदनशील बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव की घटनाएं सामने आई हैं।
महंगाई, ऊर्जा संकट और आवास की किल्लत मुख्य वजह
इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण आम नागरिकों के जीवनयापन की लागत में भारी वृद्धि होना है। खाद्यान्न, आवश्यक वस्तुओं, ऊर्जा और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को अत्यधिक प्रभावित किया है।
इसके साथ ही प्रमुख शहरों में गहराता आवास संकट (हाउसिंग क्राइसिस) एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। मकानों के किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती आवास मिलना अत्यंत कठिन हो गया है, जिससे उपजा आक्रोश अब व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है।
शिक्षा बजट में कटौती और युवाओं की नाराजगी
फ्रांस में इस आंदोलन की शुरुआत तुलनात्मक रूप से सीमित दायरे में हुई थी। स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों के रिक्त पद और शिक्षा क्षेत्र के बजट में सरकारी कटौती के विरोध में सबसे पहले छात्र और शिक्षक वर्ग सड़कों पर आया था। धीरे-धीरे यह असंतोष व्यापक स्तर पर फैल गया।
वहीं जर्मनी जैसे देशों में अनिवार्य सैन्य-सेवा से जुड़ी नीतियों और योजनाओं के खिलाफ युवा वर्ग विरोध दर्ज करा रहा है।
फ्रांस और इटली में सुरक्षा बलों से तीखी झड़पें
फ्रांस की राजधानी पेरिस और आसपास के क्षेत्रों में साढ़े पांच लाख से अधिक लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं। देश के कई शहरों में आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा है।
उधर, इटली के मिलान सहित अन्य औद्योगिक शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने सार्वजनिक रूप से इन घटनाओं की निंदा करते हुए इन्हें कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली अराजकता करार दिया है।
भ्रष्टाचार और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट पर रोष
आर्थिक चुनौतियों के अलावा सरकारी भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं के गिरते स्तर को लेकर भी नागरिकों में भारी असंतोष है। स्पेन, पुर्तगाल और ग्रीस में लोग गिरते जीवन स्तर और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
अल्बानिया में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और उच्च बेरोजगारी दर इस जनआंदोलन के केंद्र में हैं, जहां प्रदर्शनकारी शासन व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन परिस्थितियों ने मिलकर पूरे यूरोपीय क्षेत्र को गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट के सामने ला खड़ा किया है।
