Kanpur News: कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में बेगुनाह पाई गई बहू शालू मनोचा को 22 दिन बाद जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आते ही वह अपने भाई से लिपटकर रो पड़ी। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या की असली साजिश शालू ने नहीं, बल्कि उसके पति ने रची थी।
दवा कारोबारी विनीत की हत्या के आरोप में पुलिस ने शालू सहित तीन लोगों को 7 सितंबर को जेल भेजा था। बाद में गहन जांच के दौरान शालू के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इसके विपरीत उसके पति सुब्रत की भूमिका सामने आई। पुलिस द्वारा सुब्रत को गिरफ्तार करने के बाद शालू की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
सोमवार शाम रिहाई के बाद शालू बिना किसी से बात किए सीधे कार में बैठकर लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित अपने मायके चली गई। उसका मासूम बेटा श्रीजय भी लखनऊ में ही है। 22 दिनों तक जेल में बंद रहने के बाद घर लौटने पर परिवार के लोग बेहद भावुक नजर आए।
अदालत में पुलिस ने दाखिल की अंतिम रिपोर्ट
मामले के विवेचक और कल्याणपुर इंस्पेक्टर केशव कुमार तिवारी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत में अंतिम रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने केस डायरी के साथ दिए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया कि शालू मनोचा के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इसलिए उसके खिलाफ जांच बंद कर दी गई है।
पुलिस के इस आग्रह पर अदालत ने केस डायरी का अध्ययन करने के बाद शालू की न्यायिक रिमांड को निरस्त कर दिया। इसके बाद जेल प्रशासन को उसकी रिहाई के आवश्यक निर्देश भेजे गए। रिहाई का आदेश मिलते ही कानूनी औपचारिकताएं पूरी करके शालू को जेल से मुक्त कर दिया गया।
मासूम बेटे पर पड़ा गहरा असर और पारिवारिक संकट
पुलिस सूत्रों के अनुसार विनीत की पत्नी आमतौर पर गाजियाबाद में रहती थीं। पति की मौत के बाद वह कानपुर में ही हैं और अब जेल में बंद अपने बेटे सुब्रत को बचाने के प्रयास में लगी हैं। इस पारिवारिक विवाद और हत्याकांड का सबसे बुरा असर शालू और सुब्रत के मासूम बेटे पर पड़ा है।
परिवार के करीबियों के अनुसार बेटा पहले मां के बारे में पूछता था और अब पिता के जेल जाने के बाद वह दादी से सवाल करता है। वह अपने दादा विनीत से भी बेहद प्यार करता था। जन्मदिन के एक पुराने वीडियो में वह अपने दादा के गले लगा हुआ दिखाई देता है।