Chamba News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में कैस्पियन कोबरा के काटने से दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है। रिसर्च में इसे भारत में इस प्रजाति से जुड़ी इंसानों की पहली दर्ज मौत बताया गया है। कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ओमेष कुमार भारती के नेतृत्व में यह स्टडी पूरी की गई है।
‘एपिडेमियोलॉजी इंटरनेशनल’ नामक पीयर-रिव्यूड जर्नल में यह स्टडी सितंबर में पब्लिश हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह स्टडी जुलाई में जमा की गई थी और 18 अगस्त को इसे मंजूरी मिली। इसमें बताया गया कि एक पीड़ित ने काटने के 30 मिनट के अंदर दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे व्यक्ति की मौत 72 घंटे के भीतर हुई।
रिसर्च करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि मौतों के पीछे सांप का तेज कार्डियोटॉक्सिसिटी असर हो सकता है। कैस्पियन कोबरा का जहर सभी कोबरा प्रजातियों में सबसे ज्यादा ताकतवर माना जाता है। इसके जहर में न्यूरोटॉक्सिन और साइटोटॉक्सिन होते हैं, जो सीधे इंसान के तंत्रिका तंत्र पर बेहद खतरनाक हमला करते हैं।
सांप के काटने के आधे घंटे के भीतर स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है। सही समय पर इलाज न मिलने से सांस रुकने के कारण मरीज की मौत हो सकती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में नाजा ऑक्सियाना कहते हैं। आम भाषा में लोग इसे फारसी कोबरा या रूसी कोबरा के नाम से भी जानते हैं।
यह सांप स्वभाव से काफी शर्मीला होता है और इंसानों से दूर रहना पसंद करता है। हालांकि, खतरा महसूस होने पर यह तुरंत अपना फन फैला लेता है और आक्रामक हो जाता है। यह मुख्य रूप से मध्य एशिया, पाकिस्तान और कश्मीर में मिलता है। चंबा के टिस्सा में इसे पहली बार 2019 में देखा गया था।
स्टडी में बाजार में उपलब्ध एंटी-स्नेक वेनम की असरदारता पर गंभीर चिंता जताई गई है। वर्तमान दवाएं मुख्य रूप से भारत के ‘बिग फोर’ सांपों पर काम करती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये पारंपरिक दवाएं कैस्पियन कोबरा के जहर के मुख्य तत्वों को पूरी तरह बेअसर करने में काफी कम असरदार साबित होती हैं।