Shimla News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों को सप्ताह में दो दिन मिड-डे मील के साथ अतिरिक्त पौष्टिक आहार दिया जाएगा। मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना में संशोधन को औपचारिक मंजूरी मिल गई है।
अंडा या ताजे फल चुनने का मिलेगा विकल्प
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि यह अतिरिक्त आहार हर बुधवार और शुक्रवार को परोसा जाएगा। पहले यह व्यवस्था केवल एक दिन लागू थी। नई व्यवस्था में बच्चों और अभिभावकों को पसंद की छूट होगी। छात्र उबले अंडे अथवा ताजे फलों में से सेब या केला अपनी पसंद के अनुसार चुन सकेंगे।
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण, सफाई और वितरण में मानकों का सख्ती से पालन किया जाए। बच्चों को फल देने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना अनिवार्य होगा। स्थानीय महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और स्कूल प्रबंधन समितियों के सहयोग से स्थानीय स्तर पर ताजा सामग्री खरीदी जाएगी।
छात्र संख्या के आधार पर जारी होगा त्रैमासिक बजट
इस योजना के सुचारू संचालन के लिए विद्यार्थियों के दाखिले के आधार पर बजट आवंटित किया जाएगा। ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी स्कूलों को हर तीन महीने का बजट सीधे जारी करेंगे। स्कूलों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार के खर्च का अलग वित्तीय रिकॉर्ड और रजिस्टर अनिवार्य रूप से तैयार रखना होगा।
योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्कूल प्रभारियों और कुक-कम-हेल्पर्स की होगी। इसके अलावा प्रधानाचार्य, मुख्य शिक्षक और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी समय-समय पर योजना की निगरानी करेंगे। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य और समग्र विकास को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है।