हिमाचल में नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू, घरों में चार डिब्बों में कचरा अलग करना अनिवार्य

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 लागू कर दिए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब कचरा प्रबंधन केवल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी नहीं रहेगा। घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कचरे को स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य कर दिया गया है।

लापरवाही पर कट सकता है बिजली और पानी का कनेक्शन

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला ने बताया कि जिला उपायुक्त छह सप्ताह में बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई होगी। चेतावनी के बाद भी सुधार न होने पर बिजली और पानी के कनेक्शन अस्थायी रूप से काटे जा सकते हैं।

कचरा खुले में फेंकने, जलाने, जमीन में दबाने या जलस्रोतों में बहाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा जिन ग्रामीण और शहरी इलाकों में पर्यटकों की संख्या अधिक रहती है, वहां स्थानीय निकाय कचरा प्रबंधन के लिए विशेष शुल्क लगा सकेंगे। नियमों की निगरानी के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं।

चार श्रेणियों में बांटना होगा सूखा और गीला कचरा

नए नियमों के तहत गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा अलग-अलग डिब्बों में रखना होगा। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज और धातु शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में एक्सपायर्ड दवाइयां, ट्यूबलाइट और बैटरियां रखी जाएंगी। सेनेटरी कचरे को सुरक्षित पाउच में लपेटकर देना आवश्यक होगा।

छात्र बनेंगे हाउसहोल्ड सुपरवाइजर, करेंगे मॉनिटरिंग

घर-घर कचरा अलग करने की आदत डालने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’ बनाया जा रहा है। शिक्षा विभाग इसके लिए पाठ्यक्रम में विशेष मॉड्यूल शामिल करेगा। छात्र अपने परिवार को प्रेरित करेंगे और इन ऑडिट रिपोर्टों को उपायुक्तों को सौंपा जाएगा, ताकि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।

Desh Raj
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