Kullu News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की भुंतर तहसील स्थित थूंजा गांव में कमजोर पहाड़ियों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह की मोहलत दी है।
ट्रिब्यूनल इस संवेदनशील पर्यावरणीय मामले पर आगामी 17 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने दो अंतरिम आवेदनों को निष्प्रभावी करार देते हुए उनका निपटारा कर दिया। मामले में सामने आए नए घटनाक्रमों के कारण इन याचिकाओं की प्रासंगिकता खत्म हो गई थी, जिसके बाद मुख्य मुद्दे पर फोकस किया गया।
पांच-पांच मेगावाट के दो प्रोजेक्टों के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध
मूल याचिका के जरिए स्थानीय ग्रामीणों ने थूंजा गांव की ढलानों पर बन रहे पांच-पांच मेगावाट के कसोल और ग्राहण कसोल लघु जलविद्युत प्रोजेक्टों के निर्माण पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि टनल बनाने, पाइपलाइन बिछाने और अनियंत्रित विस्फोटों से ग्राहण नाले का प्रवाह और अस्तित्व दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
पेयजल संकट और बिना अध्ययन ब्लास्टिंग का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ग्राहण नाला ही पूरे गांव के लिए पीने के पानी का एकमात्र मुख्य स्रोत है। किसी भी प्रकार के ढलान स्थिरता आकलन, कंपन प्रभाव विश्लेषण या आपदा जोखिम अध्ययन के बिना ही पहाड़ियों में बारूद से विस्फोट किए जा रहे हैं। इन भारी धमाकों के कंपन से पूरा गांव असुरक्षित महसूस कर रहा है।
साल 2016 की संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए याचिका में स्पष्ट किया गया कि यह पूरा पर्वतीय क्षेत्र भूगर्भीय रूप से बेहद संवेदनशील है। दोनों परियोजनाएं कनावर वन्यजीव अभ्यारण्य के अधिसूचित ईको-सेंसिटिव जोन में आती हैं। इस स्थिति को देखते हुए एनजीटी ने सभी संबंधित उत्तरदाताओं को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का आदेश दिया है।