Science News: क्या किसी उन्नत एलियन सभ्यता ने अंतरिक्ष में अपने तकनीकी निशान छोड़े हैं? वैज्ञानिक अब इस रहस्य को सुलझाने के लिए रेडियो तरंगों के साथ चांद की मिट्टी पर भी नजर गड़ाए हुए हैं। उनका मानना है कि किसी बाहरी सभ्यता का अंतरिक्ष मलबा समय के साथ चंद्रमा तक पहुंच सकता है।
एसईटीआई इंस्टीट्यूट और बर्कबेक कॉलेज लंदन से जुड़े वैज्ञानिक लुईस पिनाल्ट के नेतृत्व में यह नई रिसर्च की गई है। इस अध्ययन को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एस्ट्रोबायोलॉजी में समीक्षा के लिए भेजा गया है। मॉडल के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि कृत्रिम कण सौर मंडल तक कैसे पहुंचे होंगे।
आर्किपोव और ब्रेसवेल पार्टिकल्स की होगी तलाश
वैज्ञानिकों ने इन काल्पनिक सूक्ष्म कणों को दो विशेष श्रेणियों में बांटा है। माइक्रोन साइज के तकनीकी मलबे को आर्किपोव पार्टिकल्स नाम दिया गया है। वहीं किसी सभ्यता द्वारा जासूसी या रिसर्च के मकसद से भेजी गई सूक्ष्म स्वायत्त मशीनों को प्रसिद्ध वैज्ञानिक के सम्मान में ब्रेसवेल पार्टिकल्स कहा गया है।
चांद पर बाहरी निशान सुरक्षित रहने का विचार सबसे पहले 1990 के दशक में सामने आया था। इस नए शोध में उस पुराने सिद्धांत को आधुनिक माइक्रोन स्तर पर विकसित किया गया है। वायुमंडल न होने के कारण चंद्रमा की सतह ऐसे अवशेषों को अरबों वर्षों तक सुरक्षित रखने में पूरी तरह सक्षम है।
भविष्य के चंद्र मिशनों में मिट्टी की होगी जांच
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि भविष्य के किसी बड़े मून मिशन में एक क्यूबिक मीटर मिट्टी की गहन जांच की जानी चाहिए। आधुनिक उपकरणों की मदद से ऐसे कृत्रिम कणों की खोज संभव है, जिनकी बनावट प्राकृतिक खनिजों से बिल्कुल अलग हो। हालांकि ऐसे किसी कण की पहचान करना बहुत जटिल चुनौती होगी।
चांद पर पहले से मौजूद इंसानी कचरे और मलबे से इन कणों को अलग पहचानना सबसे बड़ा काम होगा। इसके लिए कणों के केमिकल और फिजिकल फिंगरप्रिंट की गहरी जांच जरूरी होगी। यदि चांद पर किसी बाहरी सभ्यता का प्रामाणिक सुराग मिला, तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी वैज्ञानिक क्रांति साबित होगी।