अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिए वीटो पावर के इस्तेमाल के संकेत, कहा– ‘मिस्टर वीटो’ बनने को तैयार

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Washington News: अमेरिकी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करती है, तो वह उनके विधायी प्रस्तावों को रोकने के लिए अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने कहा कि वे विपक्षी पार्टी को अपने प्रशासन के कामकाज को प्रभावित नहीं करने देंगे।

अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के लिए मतदान से कुछ समय पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट की पत्रकार मिरांडा डिवाइन के पॉडकास्ट ‘पॉड फोर्स वन’ में दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में नियंत्रण हासिल करती है, तो वे राष्ट्रपति के विशेषाधिकार यानी वीटो पावर का व्यापक इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अब मैं मिस्टर वीटो बन जाऊंगा”।

विधायी गतिरोध और समझौतों की रणनीति

ट्रंप ने पॉडकास्ट के दौरान संभावित राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि डेमोक्रेट्स सदन में बिल पारित कर उनके पास भेजते हैं, तो वह उन पर वीटो लगा देंगे। उनका मानना है कि एक या दो महीने तक चलने वाले ऐसे विधायी गतिरोध के बाद दोनों पक्षों का समय बर्बाद होगा, जिसके बाद विपक्षी सांसद वार्ता की मेज पर आकर समझौते के लिए मजबूर हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह उम्मीद करते हैं कि ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले ट्रंप का यह बयान इस बात का दुर्लभ संकेत है कि रिपब्लिकन पार्टी को सदन में अपनी स्थिति को लेकर कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस के दोनों सदनों में चुनावी गणित

मिडटर्म चुनावों में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की सभी 435 सीटों और 100 सदस्यीय सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होना है। वर्तमान में दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के पास बेहद मामूली बढ़त है। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं, जबकि सीनेट में 53-47 का आंकड़ा है। इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि राष्ट्रपति ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के शेष दो वर्षों में अमेरिकी संसद का नियंत्रण किस दल के हाथों में रहेगा। डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण पाने के लिए केवल कुछ सीटों के अंतर को पाटना है, जिसके चलते मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।

मतदाताओं की नाराजगी के प्रमुख मुद्दे

चुनावी विश्लेषकों और सर्वेक्षणों के अनुसार, रिपब्लिकन पार्टी के सामने कई घरेलू और विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियां हैं। प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं:

  • विदेश नीति और सैन्य दखल: ईरान से जुड़े तनाव और सैन्य कदमों को लेकर अमेरिकी जनता के एक बड़े वर्ग में असंतोष देखा जा रहा है। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे चुनावी अभियानों में प्रमुखता से उठाया है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई प्रमुख डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की रणनीतियों की तीखी आलोचना की है।
  • बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत: दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और उच्च जीवन लागत को लेकर आम मतदाताओं में चिंता है। हालांकि ट्रंप लगातार अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर आर्थिक दबाव एक बड़ा चुनावी कारक बना हुआ है।
  • प्रशासनिक नीतियों पर मतभेद: स्वास्थ्य सेवा, सरकारी खर्च और कार्यकारी आदेशों को लेकर भी दोनों दलों के बीच गहरा ध्रुवीकरण बना हुआ है, जिसका सीधा असर मतदान के रुझानों पर पड़ने की संभावना है।

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