Washington News: अमेरिका और वियतनाम के बीच जारी व्यापार वार्ता के दौरान कड़ा रुख देखने को मिला है। अमरीकी कस्टम अधिकारियों ने वियतनाम स्थित चीनी कंपनियों के कारखानों में अचानक जांच की। इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव काफी बढ़ गया है।
अमेरिकी अधिकारियों ने फैक्ट्रियों के प्रोडक्शन रिकॉर्ड, कच्चे माल की सप्लाई और निर्माण प्रक्रियाओं को खंगाला। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि उत्पाद असल में वियतनाम में बन रहे हैं या चीन से लाकर उन पर “मेड इन वियतनाम” का झूठा लेबल लगाया जा रहा है।
टैरिफ से बचने और ट्रांसशिपमेंट का अमरीका ने लगाया आरोप
अमेरिका का आरोप है कि चीनी कंपनियां अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए वियतनाम का जरिया इस्तेमाल कर रही हैं। वे मामूली बदलाव कर सामान अमेरिका भेजती हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अभी तक बड़े पैमाने पर किसी गैर-कानूनी ट्रांसशिपमेंट का कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा है।
दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि वियतनाम गैर-टैरिफ रुकावटों को हटाए, ट्रांसशिपमेंट पर कड़ा नियंत्रण रखे और अमरीकी कंपनियों की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित करे।
वियतनाम ने आरोपों को नकारा और सप्लाई चेन पर बढ़ा संकट
वियतनाम ने अमरीकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी गड़बड़ियां बड़े स्तर पर नहीं हो रही हैं। देश में फर्जीवाड़े के खिलाफ सख्ती बरती जा रही है, जिसके तहत हाल ही में 50,000 नकली नाइकी जूते जब्त किए गए। वियतनाम लगातार पारदर्शी व्यापार नीति का समर्थन कर रहा है।
ऐप्पल और नाइकी जैसी कई बड़ी कंपनियों ने चीन से निर्भरता कम करने के लिए वियतनाम का रुख किया था। अब अगर अमेरिका नया टैरिफ लगाता है तो इन टेक और रिटेल कंपनियों की ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी।
सेक्शन 301 के तहत अमेरिका कर रहा तीन मामलों की जांच
अमेरिका इस वक्त वियतनाम के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत तीन अलग-अलग मामलों की गहन जांच कर रहा है। इनमें अधिक निर्माण क्षमता, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा और अनुचित व्यापार नीतियां शामिल हैं। अमरीकी प्रशासन नियमों के उल्लंघन पर बेहद सख्त नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन जांचों में वियतनाम के खिलाफ उल्लंघन के सबूत मिलते हैं, तो अमेरिका भारी पेनल्टी या नए टैरिफ थोप सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते और अधिक बिगड़ सकते हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।