Tehran News: ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने क्षेत्रीय बैठकों में भारत और इजराइल के बीच बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार मुनीर ने इन कूटनीतिक नजदीकियों को मुस्लिम देशों और पाकिस्तान के हितों के लिए प्रतिकूल बताया है।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने एक साक्षात्कार के दौरान दावा किया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हालिया क्षेत्रीय वार्ताओं में भारत और इजराइल के बीच विकसित हो रहे संबंधों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ईरानी स्टेट टेलीविजन पर प्रसारित विवरण के अनुसार मुनीर ने क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद के दौरान यह बात रखी कि दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी भविष्य में मुस्लिम जगत और विशेष रूप से पाकिस्तान के रणनीतिक हितों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
क्षेत्रीय वार्ताओं में तुर्की और ईरान के साथ चर्चा का दावा
सामने आई जानकारी के मुताबिक पश्चिम और दक्षिण एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर हुई इस चर्चा में तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन और अन्य क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी भी शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वार्ता में इस बात पर विचार-विमर्श किया गया कि पश्चिमी और दक्षिणी एशियाई क्षेत्र में उभरते नए गठजोड़ किस तरह उनके रणनीतिक प्रभाव के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की और ईरान जहां अपने-अपने भू-राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय समीकरण साधने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान इन कूटनीतिक वार्ताओं को धार्मिक और भारत विरोधी नजरिए से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
आंतरिक संकट से ध्यान भटकाने की रणनीति
कूटनीतिक और रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार पाकिस्तानी सेना प्रमुख का यह बयान पाकिस्तान के आंतरिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश हो सकता है। वर्तमान में पाकिस्तान गंभीर आर्थिक तंगी, राजनीतिक अस्थिरता, उच्च मुद्रास्फीति और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थानीय असंतोष जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।
आंतरिक व्यवस्था में जवाबदेही से बचने के लिए पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व अक्सर बाहरी खतरों और धार्मिक ध्रुवीकरण की बात उठाकर घरेलू स्तर पर कट्टरपंथी तत्वों का समर्थन जुटाने का प्रयास करता रहा है।
भारत और इजराइल की साझेदारी
वास्तविकता यह है कि भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय संबंध व्यापार, उन्नत तकनीक, कृषि विकास और आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग पर आधारित हैं। दोनों देशों की यह साझेदारी किसी तीसरे देश के विरुद्ध लक्षित नहीं है, बल्कि यह आपसी विकास, क्षेत्रीय स्थिरता और साझा हितों पर केंद्रित है। ऐसे में प्रगतिशील कूटनीतिक रिश्तों को धार्मिक खतरे के रूप में चित्रित करना पाकिस्तान की पारंपरिक सोच को ही दर्शाता है।