Kathmandu News: नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद अब बाढ़ पीड़ितों में गहरा मानसिक आघात और ट्रॉमा देखने को मिल रहा है। बच्चे और बड़े दोनों ही खौफ और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने प्रभावित इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य टीमें तैनात की हैं।
राहत कैंपों में ट्रॉमा और डर से जूझ रहे बच्चे
नुवाकोट के राहत केंद्रों में काम कर रहे मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जीवित बचे लोगों में तनाव और भय के गंभीर लक्षण मिले हैं। बच्चे रात में डरकर नींद से जाग रहे हैं और उन्हें बाढ़ के भयानक सपने आ रहे हैं। वहीं वयस्क बेचैनी, लगातार घबराहट और अनजाने डर से परेशान हैं।
आपदा में 900 से अधिक लोगों की मौत और करीब 4,000 लोगों के लापता होने से परिवारों पर गहरा असर पड़ा है। इस मानसिक संकट को देखते हुए सरकार ने सबसे अधिक प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में करीब 50 साइकेट्रिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर की विशेष टीमें फील्ड में तैनात की हैं।
हेल्पलाइन नंबर 1166 और 1098 से मिल रही मदद
बागमती प्रांत में 64 ट्रेंड काउंसलर को बैकअप के तौर पर तैयार रखा गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाटन मेंटल हॉस्पिटल के सहयोग से चौबीसों घंटे चलने वाली 1166 हेल्पलाइन शुरू की है। बच्चों की सुरक्षा और सहायता के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी सेवाएं दी जा रही हैं।