Seoul News: जापान और दक्षिण कोरिया के बीच डोकडो द्वीप विवाद एक बार फिर गहरा गया है। जापान के वार्षिक रक्षा श्वेत पत्र में डोकडो पर दावा दोहराए जाने के बाद दक्षिण कोरिया ने कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। सेउल ने स्पष्ट किया है कि डोकडो पर उसकी संप्रभुता निर्विवाद है।
जापानी राजनयिकों को तलब कर दक्षिण कोरिया ने दी कड़ी चेतावनी
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने सेउल स्थित जापानी दूतावास के उप प्रमुख काजुओ त्सुचिया को तलब कर आधिकारिक विरोध पत्र सौंपा। प्रवक्ता पार्क डू-सून ने कहा कि जापान का अनुचित दावा बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि डोकडो को लेकर जापान की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
इसके साथ ही दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने जापानी सैन्य अताशे ताकेशी नागायोशी को बुलाकर अपना विरोध जताया। जापानी कैबिनेट ने अपनी नई रिपोर्ट में डोकडो को अपनी सीमा का हिस्सा बताया है। जापान इसे ताकेशिमा कहता है, जबकि दक्षिण कोरिया इसे डोकडो नाम से पुकारता है और इस पर अपना प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण रखता है।
तनाव के बावजूद क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए दोनों देश साथ आने को मजबूर
दक्षिण कोरिया वर्तमान में इन द्वीपों पर पुलिस टुकड़ी तैनात कर नियंत्रण बनाए हुए है। जापान अपनी पाठ्यपुस्तकों और आधिकारिक दस्तावेजों में लगातार दावे करता आ रहा है। यह द्वीप समूह रणनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से दोनों देशों के बीच लंबे समय से गंभीर तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है।
द्वीप विवाद के बाद भी उत्तर कोरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए दोनों देश सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर विवश हैं। रूस और चीन के मजबूत होते संबंधों के बीच टोक्यो और सेउल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक साझेदारी बनाए रखना चाहते हैं। जापान ने अपनी रक्षा रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया को महत्वपूर्ण साझेदार भी माना है।