Jerusalem News: इजरायल में 120 सदस्यीय संसद में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है। बहुमत के लिए 61 सीटों की दरकार है, जिसमें 19 सीटों वाले अरब दल ‘किंगमेकर’ की स्थिति में हैं। इसके बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की हत्या के ऐतिहासिक संदर्भों और आंतरिक सुरक्षा चिंताओं के कारण प्रमुख दल इनसे दूरी बनाए हुए हैं।
इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी खींचतान चरम पर पहुंच गई है। 120 सदस्यों वाली इजरायली संसद (नेसेट) के हालिया चुनावी नतीजों में किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो सका है। वर्तमान में बेंजामिन नेतन्याहू समर्थित गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि पूर्व मिलिट्री चीफ और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों ही पक्षों को अन्य दलों के समर्थन की सख्त जरूरत है।
इस राजनीतिक गणित में 19 सीटों वाले अरब दल सरकार बनवाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, पर्याप्त सीटें होने के बावजूद नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों ही खेमे अरब पार्टियों से गठबंधन करने में झिझक रहे हैं। इस हिचकिचाहट के पीछे 4 नवंबर 1995 को हुई इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की हत्या से जुड़े ऐतिहासिक और संवेदनशील राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं।
विपक्षी खेमे की बैठक और बहुमत का संकट
सरकार गठन की रणनीतियों को लेकर विपक्षी खेमे में भी लगातार मंथन चल रहा है। गादी आइजेनकोट की अगुवाई में हुई बैठक में आतिद पार्टी के नेता याइर लैपिड, बेयतेनु पार्टी के प्रमुख एविग्दोर लिबरमैन, डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता याइर गोलान और बेयाचद पार्टी के नफ्ताली बेनेट शामिल रहे। इसके बावजूद 48 सीटों पर सिमटा यह गठबंधन अरब दलों के प्रत्यक्ष समर्थन के बिना 61 का आंकड़ा नहीं छू पा रहा है।
दूसरी ओर, अरब दल मुख्य रूप से अरबी मूल के नागरिकों के अधिकारों और इस्लामिक मूवमेंट के हितों की पैरवी करते हैं। फिलिस्तीन विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और पड़ोसी मुस्लिम देशों के साथ इजरायल के ऐतिहासिक तनाव के कारण इजरायल की मुख्यधारा की यहूदी पार्टियां अरब दलों के साथ औपचारिक गठबंधन करने से बचती रही हैं। नेतन्याहू का धुर दक्षिणपंथी रुख भी इस गठबंधन में एक बड़ा वैचारिक अवरोध बना हुआ है।
यित्जाक राबिन हत्याकांड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इजरायली सियासत में अरब दलों के समर्थन को लेकर संकोच की मुख्य जड़ें 31 साल पुरानी घटना से जुड़ी हैं। 4 नवंबर 1995 को तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन की तेल अवीव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राबिन इजरायल के इतिहास में एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनकी राजनीतिक हत्या हुई। तेल अवीव के जिस इलाके में उन पर हमला हुआ था, वह स्थान आज ‘राबिन स्क्वेयर’ के नाम से जाना जाता है।
राबिन की हत्या किसी विदेशी शक्ति या फिलिस्तीनी नागरिक ने नहीं, बल्कि खुद एक इजरायली यहूदी नागरिक ने की थी। वह राबिन की शांति वार्ता और अरब समर्थक नीतियों का कड़ा विरोध कर रहा था। उस दौर में राबिन की सरकार को अरब सांसदों का बाहरी समर्थन हासिल था, जिसे इजरायल के कई दक्षिणपंथी समूह स्वीकार नहीं कर पाए थे। इसी कड़वे ऐतिहासिक अनुभव के चलते आज भी इजरायल का कोई भी प्रमुख राजनीतिक गुट सत्ता में आने के लिए अरब दलों से सीधे हाथ मिलाने का जोखिम उठाने से बच रहा है।