Islamabad News: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी कमी से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। अधिकांश अस्पतालों के आईसीयू पूरी तरह भरे हुए हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक जीवनरक्षक उपकरण न मिलने से कई गंभीर मरीज इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।
अस्पतालों में बेड्स की भारी कमी और बढ़ती आबादी का दबाव
वरिष्ठ पत्रकार आबिद रज़ा काज़मी की वेंटिलेटर न मिलने से मौत के बाद यह मुद्दा गंभीर हो गया है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सभी 12 वेंटिलेटर व्यस्त थे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब यह अस्पताल बना था तब इस्लामाबाद की आबादी 5 लाख थी, जो अब 50 लाख हो चुकी है।
अस्पताल की ‘नो रिफ्यूजल पॉलिसी’ के कारण मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर ही करना पड़ रहा है। दूसरे पॉलीक्लिनिक अस्पताल के प्रवक्ता के अनुसार केवल नए उपकरण खरीदने से समाधान नहीं होगा। देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है, जिससे समस्या और गंभीर हो गई है।
निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च और सरकार के कदम
निजी अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर का खर्च रोजाना 3 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है। इस कारण संपन्न परिवार भी सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। सरकार अब नए ब्लॉक में 40 वेंटिलेटर जोड़ने की तैयारी में है। वहीं स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू करने के सुझाव भी सामने आ रहे हैं।