New Delhi News: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के चोरनोमोर्स्क बंदरगाह पर एक व्यावसायिक जहाज फंस गया है। इस जहाज पर एक दर्जन से अधिक भारतीय नाविक सवार हैं। क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण नाविकों की जान पर संकट बना हुआ है। अब तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ने भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, एमवी अमीर-1 नामक जहाज पर कुल 15 चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। इनमें 12 भारतीय नागरिक शामिल हैं जो लगातार हमले के डर के साये में काम करने को मजबूर हैं। यूनियन ने भारत सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की है।
हमलों के बीच फंसे क्रू मेंबर्स की जान को बड़ा खतरा
यूनियन ने अपने बयान में कहा कि जहाज के आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइलें गिर रही हैं। क्रू सदस्य हर समय सीधे हमले की आशंका से डरे हुए हैं। संगठन ने जहाज मालिकों, फ्लैग स्टेट और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे भारतीय नाविकों को युद्ध क्षेत्र में असहाय न छोड़ें और उन्हें तुरंत वहां से बाहर निकालें।
भारतीय नाविक की मौत पर यूक्रेन के राजदूत को किया गया तलब
इससे पहले सोमवार को भारत ने यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को विदेश मंत्रालय में तलब किया था। पिछले हफ्ते काला सागर में वाणिज्यिक पोत ‘एमवी ओमोर्फी’ पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई थी। भारत ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की सख्त शब्दों में निंदा की थी।
समुद्री नौवहन की सुरक्षा को लेकर भारत ने जाहिर की चिंता
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों और नाविकों की जान जोखिम में डालने वाले कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। इससे पूर्व भारत ने रूसी दूतावास के प्रभारी को भी तलब कर वाणिज्यिक पोत पर हुए हमले की निंदा की थी, जिसमें चार भारतीयों समेत 10 लोगों की मौत हुई थी। यूक्रेनी दूतावास ने भी पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।