Lhasa News: चीन सरकार ने तिब्बत की प्रसिद्ध लारुंग गार बौद्ध अकादमी में भिक्षुओं और भिक्षुणियों के खिलाफ कठोर कदम उठाया है। चीनी प्रशासन ने हाल ही में तोड़े गए आवासों में रह रहे साधुओं को तुरंत परिसर खाली करने का निर्देश दिया है। तिब्बत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने भिक्षुओं को जबरन उनके गृह क्षेत्रों में भेजना शुरू कर दिया है।
सुरक्षा और भीड़ का हवाला देकर चलाया गया विध्वंस अभियान
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 13 जुलाई से लारुंग गार में फिर से बड़ा विध्वंस अभियान शुरू किया है। चीनी अधिकारियों का दावा है कि अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा चिंताओं के कारण यह कदम उठाया गया है। इस कार्रवाई के तहत कुल 1,060 मठवासी आवासों को गिराने की योजना बनाई गई है, जिससे वहां रहने वाले साधुओं में भारी निराशा है।
प्रशासन की शुरुआती योजना ग्युट्रुल मंदिर के आसपास के क्षेत्र को ध्वस्त करने की थी। हालांकि, मठ के प्रतिनिधियों के कड़े विरोध के कारण चीनी अधिकारियों को अपनी योजना बदलनी पड़ी। इसके बाद प्रशासन ने भिक्षुओं और भिक्षुणियों के निजी आवासों को निशाना बनाया और एक हजार से अधिक निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी।
मठवासियों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां
चीनी प्रशासन ने सेर्थार के बाहर से आए सभी भिक्षुओं और भिक्षुणियों को अपने मूल मठों या परिवारों के पास लौटने का आदेश दिया है। वहीं, स्थानीय साधकों को भी अकादमी छोड़कर अपने-अपने गांवों के मठों में जाने को कहा गया है। इसके साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों के प्रवेश पर भी सख्त पाबंदियां लगा दी गई हैं।
लारुंग गार में इस तरह की दमनकारी कार्रवाई पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले चीनी प्रशासन ने वर्ष 2001, 2016 और 2019 में भी बड़े पैमाने पर मकानों को तोड़ा था। हर बार अधिकारियों ने अत्यधिक भीड़, सुरक्षा मानकों और कानूनी अनुमति का हवाला देकर निष्कासन अभियान चलाया है, जिससे बौद्ध समुदाय की धार्मिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ा है।