Tehran News: पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिशों को तेहरान में बड़ा झटका लगा है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई और आईआरजीसी के शीर्ष अधिकारियों ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बीच सामने आया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने के उद्देश्य से तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की कूटनीतिक पहल को गंभीर झटका लगा है। ईरानी मीडिया आउटलेट ‘तबनाक’ और समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के हवाले से सामने आई खबरों के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मोहसिन रेजाई ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख से मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया है।
मुनीर की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों और अमेरिका-इजरायल की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंकाओं के चलते पूरा पश्चिम एशिया गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर पड़ा है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो मई के बाद का उच्चतम स्तर है।
आईआरजीसी ने मुलाकात का अनुरोध ठुकराया
रिपोर्टों के अनुसार, केवल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ही नहीं, बल्कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मुनीर के बार-बार किए गए अनुरोधों के बावजूद मिलने से परहेज किया। सूत्रों का कहना है कि ईरानी सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठान को संदेह है कि पाकिस्तान इस पूरे मामले में अमेरिका के रणनीतिक हितों को साधने का प्रयास कर रहा है। इसी अविश्वास के चलते तेहरान ने शांति वार्ताओं में इस्लामाबाद की किसी भी प्रकार की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार करने से मना कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मुनीर का यह दौरा पहले रविवार शाम तक टलता दिख रहा था, लेकिन सोमवार दोपहर इसे अचानक अंतिम रूप दिया गया। कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि इस तरह की यात्राओं का प्राथमिक उद्देश्य अक्सर तेल बाजार की अस्थिरता को थामना और बाजार को विश्वास दिलाना होता है, भले ही जमीनी स्तर पर बातचीत में कोई ठोस प्रगति न दिखे।
ईरान का सख्त रुख: शर्तें पूरी होने तक बातचीत नहीं
इस राजनयिक गतिरोध के बीच ईरान के रुख में नरमी के बजाय और सख्ती देखी जा रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कथित तौर पर स्पष्ट किया है कि संघर्ष के किसी भी कूटनीतिक समाधान से पहले अमेरिका को ईरान की सात प्रमुख शर्तें माननी होंगी।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने परमाणु मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि देश के अत्यधिक संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजा जाएगा।
तेहरान के भीतर कूटनीतिक संतुलन में बदलाव
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के हफ्तों में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सार्वजनिक कूटनीतिक गतिविधियों में आई कमी इस बात का संकेत है कि तेहरान में अब वार्ता के जरिए समाधान चाहने वाले नरम रुख के बजाय रेजाई जैसे सख्त रुख वाले नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है।
ईरान ने अब तक अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया के डर से खाड़ी क्षेत्र के कुछ संवेदनशील समुद्री और संचार केंद्रों को सीधे निशाने पर लेने से परहेज किया है। हालांकि, वहां के नीति-निर्माताओं के एक वर्ग का मानना है कि युद्ध की स्थिति को समाप्त कराने के लिए अमेरिका पर अधिक रणनीतिक दबाव बनाना ही एकमात्र विकल्प है। हालांकि, इन सभी दावों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और क्षेत्र में अनिश्चितता की स्थिति लगातार बनी हुई है।
