अब्दुल एल-सैयद ने रचा इतिहास, माइक रोजर्स को हराकर बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर

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Washington News: अमेरिकी राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने मिशिगन सीनेट चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को 1.27 लाख से अधिक मतों से पराजित कर देश के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने का गौरव हासिल किया है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) के आए नतीजों में मिशिगन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रत्याशी अब्दुल एल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया है। इस निर्णायक जीत के साथ ही अब्दुल अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम नेता बन गए हैं। इस चुनाव परिणाम के साथ मिशिगन की इस अहम सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा बरकरार रहा है, जिसका प्रतिनिधित्व अब तक सेवानिवृत्त हो रहे सीनेटर गैरी पीटर्स कर रहे थे।

1.27 लाख से अधिक वोटों के अंतर से दर्ज की जीत

चुनाव नतीजों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मिशिगन सीनेट मुकाबले में अब्दुल एल-सैयद को 18,72,595 मत मिले, जो कुल मतदान का 50.74 प्रतिशत है। उनके प्रतिद्वंद्वी और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रोजर्स को 17,45,183 वोट (47.29 प्रतिशत) हासिल हुए। अब्दुल ने रोजर्स को 1,27,412 वोटों के अंतर से मात दी। अमेरिकी चुनाव डेटा एजेंसी ‘डिसीजन डेस्क हेडक्वार्टर्स’ (Decision Desk HQ) ने भी उनकी इस जीत की पुष्टि कर दी है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सीनेटर तक का सफर

मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में जन्मे 42 वर्षीय अब्दुल एल-सैयद मूल रूप से मिस्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासी परिवार से आते हैं। पेशे से डॉक्टर अब्दुल सक्रिय राजनीति में आने से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। वह डेट्रॉयट और वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभागों का नेतृत्व भी कर चुके हैं।

राजनीतिक स्तर पर अब्दुल ने वर्ष 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए दावेदारी पेश की थी, हालांकि पार्टी के प्राइमरी चुनाव में उन्हें ग्रेचेन व्हिटमर से हार का सामना करना पड़ा था। अपनी मौजूदा चुनावी मुहिम में उन्होंने आम जनता के लिए किफायती और सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे को प्राथमिकता दी। वह सभी नागरिकों को सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराने वाली ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’ योजना के प्रबल समर्थक रहे हैं। इसके अलावा, राजनीति में कॉर्पोरेट फंडिंग को सीमित करने और बिना शर्त अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहायता की समीक्षा करने जैसे प्रगतिशील मुद्दों पर भी उनका स्पष्ट रुख रहा है।

प्रचार अभियान में तीखे हमलों के बीच मिली कामयाबी

यह चुनावी मुकाबला प्रचार के दौरान लगे तीखे राजनीतिक आरोपों के कारण भी चर्चा में रहा। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल एल-सैयद पर कड़े प्रहार किए थे और उनकी निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में घेरा था। ट्रंप ने उनके संसद प्रवेश को लेकर भी विवादित बयान दिए थे, जिसकी कई राजनीतिक हलकों और पूर्व अरब-अमेरिकी सहयोगियों ने निंदा की थी। इन राजनीतिक हमलों के बावजूद आए नतीजों ने डेमोक्रेटिक पार्टी को बड़ी मजबूती दी है।

स्विंग स्टेट में राजनीतिक समीकरण और भविष्य के संकेत

मिशिगन अमेरिका के प्रमुख ‘स्विंग स्टेट्स’ में शुमार है, जहां मतदाताओं का रुझान लगातार बदलता रहता है। ऐसे राज्य में अब्दुल की जीत का एक अहम आधार वहां रहने वाली अरब और मुस्लिम आबादी की मजबूत उपस्थिति भी रही। मिशिगन का डियरबॉर्न क्षेत्र विशेष रूप से बड़ी अरब आबादी का केंद्र है, जहां से पहले भी मुस्लिम प्रतिनिधि अमेरिकी संसद के निचले सदन में चुने जाते रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत का प्रभाव केवल मिशिगन तक सीमित नहीं रहेगा। वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के दबदबे के बीच इस सीट को बचाना डेमोक्रेट्स के लिए संख्याबल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था। साथ ही, यह परिणाम डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रगतिशील मुद्दों की स्वीकार्यता को रेखांकित करता है, जिसे वर्ष 2028 के आगामी राष्ट्रपति चुनाव की रणनीतियों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

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